होनोलुलु. हवाई जहाज पर चढ़ने वालों को बार-बार बताया जाता है कि आसमान में हवा का दबाव बढ़ जाता है और तापमान शून्य से नीचे चला जाता है लेकिन ऐसे ही हालात में 24 हजार फीट की ऊंचाई पर एक प्लेन की छत उखड़कर उड़ गई और फिर जो हुआ उसकी कल्पना से भी आपकी रूह कांप उठेगी.
 
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अमेरिका के हवाई प्रांत में हिलो एयरपोर्ट से हवाई की राजधानी होनोलुलु के लिए एलोहा एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या 243 ने 28 अप्रैल, 1988 को उड़ान भरी तो सब कुछ ठीक था. विमान पर 90 यात्री और 5 क्रू मेंबर समेत कुल 95 लोग सवार थे. ये फ्लाइट इस उड़ान से पहले दिन में तीन रिटर्न उड़ान भर चुकी थी लेकिन कहीं कोई दिक्कत नहीं हुई.
 
13 मिनट में हो गई इमरजेंसी लैंडिंग इसलिए बची 94 की जान
 
50 मिनट के इस हवाई सफर के लिए बोइंग 737-297 फ्लाइट हिलो के लोकल समय से दोपहर 1.25 बजे उड़ी और करीब 1.48 बजे वो 24 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रही थी जब अचानक एक धमाकेदार आवाज के साथ फ्लाइट की छत टूट गई. इसके बाद शुरू हो गया हाहाकार.
 
उस वक्त यात्रियों को चाय-पानी दे रही एयरहोस्टेस क्लाराबेली लैनस्गिं हवा के के साथ बह गईं और फिर कभी बरामद नहीं की जा सकीं. फ्लाइट पर हवा का दबाव इतना ज्यादा था कि छोटी सी सुराख बड़ी होती चली गई और विमान की 18 फीट से ज्यादा छत हवा में ही बिखर गई और कभी मिल नहीं पाई.
 
8500 घंटे से ज्यादा उड़ान अनुभव वाले पायलट की सूझ-बूझ से बची 94 जान
 
8500 घंटे जहाज उड़ा चुके रॉबर्ट स्कॉर्न्सथीमर पायलट टीम के कप्तान थे जिन्हें 6700 घंटे का अनुभव बोइंग 737 उड़ाने का ही था. उनके साथ को-पायलट सीट पर मैडलीन टॉम्पकिन्स थीं. मैडलीन को 8000 घंटे की उड़ान का अनुभव था जिसमें 3500 घंटे बोइंग 737 के थे. मतलब, पायलट टीम को उस विमान को उड़ाने का बहुत बढ़िया अनुभव था और शायद यही अनुभव विमान पर सवार 94 लोगों के काम आया.
 
प्लेन की छत जब पहली बार उखड़ी तब मैडलीन फ्लाइट उड़ा रही थीं लेकिन इसके तुरंत बाद रॉबर्ट ने कमान संभाल ली और दोनों ने फ्लाइट को 13 मिनट के अंदर करीब 1.58 बजे सबसे पास के मॉई आइलैंड के कहुलुई एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंड करा दिया. लैंडिंग सेफ रही और लैंडिंग के तुरंत बाद पायलट ने सारे यात्रियों को इमरजेंसी तरीके से बाहर निकाला.
 
विमान पर सवार 95 में 94 यात्री बाल-बाल बच गए. इस भयानक हादसे में मात्र एक की जान गई और वो एयरहोस्टेस क्लाराबेली थीं. उनके अलावा विमान पर सवार 65 लोग घायल तो हुए लेकिन उनकी जान बच गई. 8 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. जिस एयरपोर्ट पर विमान उतारा गया वो एयरपोर्ट इस तरह के हादसे के लिए तैयार नहीं था इसलिए यात्रियों को अस्पताल ले जाने में परेशानी हुई.
 
हादसे की जांच में एलोहा एयरलाइंस की मैंटेनेंस टीम को दोषी पाया गया
 
हालांकि हादसा तकरीबन 15 मिनट लंबा था लेकिन ये 15 मिनट फ्लाइट पर सवार यात्रियों के लिए 15 युगों के बीत जाने जैसा था. यात्री गेल यामामोटो ने जांच के दौरान बताया कि उन्होंने फ्लाइट में चढ़ते वक्त ही दरार देखा था लेकिन इसके बारे में किसी को बताया नहीं.
 
हादसे की जांच के बाद अमेरिका के नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड ने एलोहा एयरलाइंस को इसके लिए दोषी पाया जिसने 19 साल पुराने विमान की ठीक से जांच-परख के बिना उसे उड़ाने की इजाजत दी. जांच में विमान मैंटेंनेंस टीम को इसके लिए दोषी ठहराया गया. 
 
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जांच में फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन को भी दोषी माना गया क्योंकि विमान को ठीक से जांचे बिना क्लीयरेंस देने के लिए उसकी जवाबदेही बनती थी. हादसे के बाद पुराने विमानों को क्लीयरेंस देने के कई नियम कड़े कर दिए गए ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों. एक नियम ये आया कि 34000 घंटे की उड़ान के बाद विमान का एयरफ्रेम यानी उसके पूरे ढांचे को उड़ान से हटा लिया जाएगा.
 
ये देखिए विमान हादसे का नाटकीय रूपांतरण वीडियो और सुनिए मैडलीन को