वाशिंगटन. पाकिस्तान के ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के ठिकाने से मिले अल कायदा के एक दस्तावेज में साल 2008 में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों द्वारा किए गए मुंबई हमले को ‘जाबांज फिदाई’ और पुणे की जर्मन बेकरी पर हमले को ‘शानदार बड़ा’ धमाका बताया गया है. इस 15 पृष्ठ के दस्तावेज ‘टेरर फ्रेंचाइजीज: द अनस्टॉपेबल एसासिन’ टेक्स वाइटल रोल फॉर इट्स सक्सेज’ में मुंबई हमले को ‘मुबारक’ अभियान करार दिया गया है. यह दस्तावेज वास्तविक रूप से अंग्रेजी भाषा में है.

दस्तावेज में अल कायदा और उससे जुड़े संगठनों से कहा गया है कि अमेरिकियों तथा ब्रिटेन, जर्मनी और भारत सहित अमेरिका के साझेदार देशों के लोगों को आतंकी हमले में मारा जाए. इसमें कहा गया है, ग्लोबल मुजाहिदीन का मिशन वैश्विक स्तर पर अमेरिकी आर्थिक लक्ष्यों को निशाना बनाकर अमेरिका की अर्थव्यवस्था को तबाह करना है. दस्तावेज कहता है, लंदन विस्फोट और इससे पहले इंडोनेशिया, पाकिस्तान, मिस्र, भारत और दूसरे स्थानों पर अमेरिकी और यूरोपीय स्थानों को निशाना बनाकर कई मुबारक अभियान चलाए गए.

इनमें इस्लामाबाद में फ्रांसीसी नागरिकों को ले जा रही बस पर बम हमला, मैरियट होटल विस्फोट, डेनमार्क के दूतावास पर विस्फोट, बाली विस्फोट और बाद में भारत की वित्तीय राजधानी बंबई में जाबांज फिदाई (शहादत) अभियान अंजाम दिया गया, जिनमें कई अमेरिकियों और पश्चिमी देशों के दूसरे नागरिकों को निशाना बनाया गया. अल कायदा के दस्तावेज में कहा गया है, इसके बाद भारत में जर्मनी बेकरी पर शानदार बड़ा धमाका किया गया, जहां मुख्य रूप से यहूदी और पश्चिमी देशों के नागरिक जाते थे. मुंबई हमले के दो साल बाद 2010 में पुणे की जर्मनी बेकरी पर आतंकवादी हमला हुआ था.

यह दस्तावेज उन ढेर सारे दस्तावेजों में शामिल है जो ऐबटाबाद में ओसामा के ठिकाने से बरामद किए गए थे. अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने इन दस्तावेजों को सूचना का बेशकीमती खजाना करार दिया. इन दस्तावेजों का एक हिस्सा अरबी भाषा में है. इनका अनुवाद अंग्रेजी भाषा में किया गया है. इन दस्तावेजों में अल कायदा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सख्त खिलाफ दिखती है. अल कायदा ने आईएसआई को सीआईए का साझेदार करार दिया.

IANS