बैंकॉक. थाइलैंड के प्रसिद्ध टाइगर टेंपल में मौजूद 137 बाघों को वहां से निकालकर देश के दो ब्रीडिंग सेंटर में भेज रहे वन्य अधिकारियों को मंदिर के किचन के फ्रीजर में बाघ के बच्चों के 40 शव मिले हैं जिससे इस बौद्ध मंदिर पर लगे तस्करी के आरोपों का शक गहरा गया है.
 
मंदिर से बाघ के बच्चों के शव के अलावा एक भालू के बच्चे का शव और हिरण के सींग के साथ-साथ काफी वन्य जीव से जुड़ी चीजें मिलीं हैं. पेटा समेत कई एनिमल राइट ग्रुप इस मंदिर में पशुओं पर अत्चायार का सवाल उठाते रहे हैं. कई संगठनों का आरोप रहा है कि ये मंदिर वन्य जीवों के सामान की तस्करी का अड्डा है.
 
मंदिर प्रशासन ने इस पर अपनी सफाई में कहा है कि 2010 तक मंदिर में बाघ के मरने वाले बच्चों को बौद्ध रीति से दफनाया जाता था लेकिन 2010 में मंदिर के पशुपालन अधिकारी ने मरे हुए शावकों के शव को फ्रीजर में रखने की शुरुआत की जिसका पूरा दस्तावेज मंदिर के पास है. मंदिर का कहना है कि बाघ के हर बच्चे की मौत की तारीख, तस्वीर का रिकॉर्ड उसके पास है.
 
 
15 साल पहले वाट पा लुआंग्टा बुआ यान्नासम्पानो यानी टाइगर टेंपल ने बौद्ध लोगों ने बाघ को ये कहकर पालना शुरू किया था कि आध्यात्मिक शांति हो तो आदमी और जानवर एक साथ रह सकते हैं. तब से बौद्धों के इस मंदिर और थाइलैंड सरकार के बीच कोर्ट में मामला चल रहा था. कोर्ट ने हाल में वन्य जीव विभाग को आदेश दिया कि वो सारे बाघों को सुरक्षित जगह पर शिफ्ट करे. 
 
वन्यजीव अधिकारियों ने टाइगर टेंपल के करीब 100 बाघों को अपने कब्जे में ले लिया है. इस मंदिर में 137 बाघ होने का अनुमान है. अधिकारियों का कहना है कि सारे बाघों को बेहोश करके शिफ्ट किया जा रहा है और इस काम में करीब एक सप्ताह का वक्त लग सकता है. इन बाघों को देश के दो दूसरे बाघ ब्रीडिंग सेंटर में भेजा जा रहा है. 
 
वन्य जीव अधिकारियों का कहना है कि इन बाघों को वापस जंगल में नहीं छोड़ा जा सकता क्योंकि बौद्ध मंदिर में पैदा और पले-बढ़े ये बाघ जंगली जन-जीवन के आदी नहीं हैं. इसलिए सबसे मुफीद यही है कि इन्हें ब्रीडिंग सेंटर में भेजा जाए. दूसरी बात ये है कि ये सारे बाग बंगाल टाइगर प्रजाति के हैं जब थाइलैंड के बाघ दूसरी प्रजाति के हैं.