नई दिल्ली. अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रह चुके हुसैन हक्कानी ने कहा है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेस इंटेलीजेंस (आईएसआई) के पूर्व प्रमुख ने स्वीकार किया है कि मुंबई में 26/11 को हुए आतंकी हमले में पाकिस्तानी सेना के कुछ सेवानिवृत्त अधिकारी शामिल थे. 
 
साल 2008 में हुए उस हमले में 116 लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे. लेफ्टिनेंट जनरल शुजा पाशा तब पाकिस्तान की आईएसआई के प्रमुख थे. उन्होंने अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के अपने समकक्ष जनरल माइकल हेडन के साथ साल 2008 के दिसंबर में हुई बैठक में यह बात स्वीकार की थी. 
 
बुक में किया भारत-पाक का विश्लेषण
हक्कानी ने अपनी नई पुस्तक ‘इंडिया वर्सेज पाकिस्तान : व्हाई कांट वी जस्ट बी फ्रेंड्स’ में इस बात का उल्लेख किया है. पुस्तक के प्रकाशक ‘जगरनॉट बुक्स’ ने कहा है कि इसमें पाकिस्तानी सेना का विशेष संदर्भ है. भारत-पाकिस्तान के रिश्ते का विश्लेषण बिना लाग लपेट के किया गया है. 
 
पाक के गर्दन की नस है कश्मीर
हक्कानी बेनजीर भुट्टो सहित पाकिस्तान के चार प्रधानमंत्रियों के सलाहकार रह चुके हैं. हक्कानी कहते हैं कि पाकिस्तान का हर स्कूली बच्चा सीखता है कि कश्मीर पाकिस्तान के गर्दन की नस है. वह फिर सवाल करते हैं कि क्या वास्तव में ऐसा है? यदि ऐसा होता, तो पाकिस्तान 69 सालों तक बिना गर्दन की नस के ही जिंदा कैसे रहा?
 
नवाज ने अमेरिका को लिखा गोपनीय पत्र
पुस्तक के प्रकाशक ‘जगरनॉट बुक्स’ ने कहा है कि इसमें पाकिस्तानी सेना का विशेष संदर्भ है. भारत-पाकिस्तान के रिश्ते का विश्लेषण बिना लाग लपेट के किया गया है. इस विश्लेषणात्मक पुस्तक में हक्कानी ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के अब तक अप्रकाशित एक गोपनीय पत्र का भी हवाला दिया है, जिसे उन्होंने अमेरिका के विदेशमंत्री को लिखा था.
 
क्या लिखा पत्र में ?
पत्र में नवाज शरीफ ने शिकायत की थी कि कश्मीर और पंजाब में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान को आरोपी बनाने और ‘भारत सरकार द्वारा कश्मीर में आतंकवाद चलाने’ पर अमेरिका की चुप्पी को समझ पाना कठिन है. पत्र में भारत पर पाकिस्तान के सिंध एवं पंजाब प्रांत में आतंक, विनाश और तोड़-फोड़ करने का आरोप लगाया गया है.