ढाका. बांग्लादेश के पश्चिमोत्तर हिस्से में आईएसआईएस के सशस्त्र आतंकवादियों ने शनिवार को विश्वविद्यालय के एक उदारवादी प्रोफेसर की उनके घर के पास ही नृशंस हत्या कर दी. इस मुस्लिम बहुल देश में ब्लॉगरों, बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं पर हुए बर्बर हमलों की श्रृंखला में यह ताजा घटना है.
 
पुलिस ने बताया कि राजशाही शहर में राजशाही विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एएफएम रेजाउल करीम सिद्दीकी (58) पर उनके आवास से करीब 50 मीटर दूरी पर ही मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने धारदार हथियार से उनका गला रेत दिया.
 
स्थानीय थाना प्रभारी शहादत हुसैन ने फोन पर कहा, ‘सुबह करीब साढ़े सात बजे हमलावरों ने प्रोफेसर पर पीछे से धारदार हथियारों से वार किया. तब वह अपने घर से पैदल विश्वविद्यालय परिसर जा रहे थे.’ उन्होंने बताया कि अंग्रेजी साहित्य के इन प्रोफेसर की तत्काल मौत हो गई, जिसके बाद हमलावर वहां से फरार हो गए. शव खून से लथपथ पड़ा था. एक चश्मदीद के अनुसार उसने दो व्यक्तियों को वहां से मोटरसाइकिल पर भागते हुए देखा.
 
इस्लामिक स्टेट ने ली जिम्मेदारी
अमेरिका स्थित निजी खुफिया सेवा समूह एसआईटीई ने कहा कि इस्लामिक स्टेट ने हत्या की जिम्मेदारी ली है. एसआईटीई ने एक ट्वीट में कहा कि आईएसआईएस की एजेंसी अमग ने बांग्लादेश में अनीश्वरवाद का आह्वान करने को लेकर राजशाही विश्वविद्यालय के प्रोफेसर की हत्या करने की जिम्मेदारी ली है.
 
इसके पहले राजशाही के पुलिस आयुक्त मोहम्मद शम्सुद्दीन ने घटनास्थल पर संवाददाताओं को बताया कि ‘हत्या के तरीके से लगता है कि यह इस्लामी आतंकवादियों का काम हो सकता है’ उन्होंने बताया कि प्रोफेसर के गर्दन पर कम से कम तीन बार हमला किया गया तथा 70-80 फीसदी गला कट गया था. हमले की प्रकृति से ऐसा लगता है कि यह अतिवादी संगठनों का काम है.
 
छात्रों-शिक्षकों ने निकाली रैली
पुलिस मामले की जांच कर रही है. इस बीच, विश्वविद्यालय के नाराज शिक्षकों और छात्रों ने अपराधियों को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में रैली निकाली. सिद्दीकी के सहयोगियों ने बताया कि वह परिसर में सांस्कृतिक गतिविधियों में लगे रहते थे और बांसुरी एवं सितार बजाया करते थे.
 
विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के प्रोफेसर दुलाल चंद्र विश्वास ने कहा, ‘वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े होने को लेकर नहीं जाने जाते थे. उनका प्रगतिशील दृष्टिकोण था, जिससे वह शायद प्रतिक्रियावादी (इस्लामवादी) ताकतों के कोपभाजन बने.’ पिछले साल चार प्रख्यात धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगरों की हत्या कर दी गई थी.