न्यूयॉर्क. भारत ने 170 देशों के साथ मिलकर शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र में ऐतिहासिक पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते पर हस्ताक्षर किए. अब धरती के बढ़ते तापमान का मुकाबला करने के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के मोर्चे पर ये सभी देश मिलकर काम करेंगे. 
 
इस मौके पर भारत ने कहा विकसित देशों को नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना चाहिए न कि इसमें रुकावट पैदा करना चाहिए. समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए भारत के पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बैठक में हिस्सा लिया. उन्होंने इस मौके पर कहा कि धनी देशों के दशकों के औद्योगिक विकास के बाद जलवायु परिवर्तन से लड़ने का बोझ गरीब देशों के कंधों पर नहीं डाला जा सकता. भारत ने हर परिवार को बिजली की आपूर्ति की सरकार की योजना के तहत 2022 तक अपना नवीकरणीय विद्युत क्षमता चार गुणा बढ़ाकर 175 गिगावाट करने की योजना की घोषणा की है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसी हफ्ते एक कार्यक्रम में कहा था कि अपनी विकास जरूरतों के बावजूद भारत जलवायु की सुरक्षा के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है.
 
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने इस मौके पर कहा कि यह  इतिहास में एक अहम क्षण है. आज आप भविष्य से जुड़े एक संविदापत्र पर हस्ताक्षर कर रहे हैं. हम समय से होड़ कर रहे हैं. इससे पहले 1982 में 119 देशों ने समुद्री नियम संधि पर हस्ताक्षर किए थे. इस हस्ताक्षर के बाद देशों को अपने यहां से इस समझौते को मंजूरी दिलानी होगी. जब यूएनएफसीसी से जुड़े कम से कम 55 देश, जिनका वैश्विक उत्सर्जन कम से कम 55 फीसदी हो, इस समझौते को घरेलू स्तर पर मंजूरी प्रदान कर देंगे तब उसके 30 दिनों के अंदर यह प्रभाव में आ जाएगा.