इस्लामाबाद. पाकिस्तान द्वारा भारतीय जासूस कुलभूषण जाधव की गिरफ्तारी से रिश्तों में कोई गिरावट नहीं आई है. पाकिस्तान के एक अग्रणी समाचार पत्र के संपादकीय में यह कहा गया है. इसमें साथ ही कहा गया है कि पाकिस्तान और भारत के बीच जासूसी के मुद्दे को दोनों देशों को मिलकर सुलझाना चाहिए.
 
पाकिस्तानी समाचार पत्र ‘द डॉन’ ने प्रकाशित संपादकीय ‘द स्पाय अफेयर’ में कहा कि हालांकि बलूचिस्तान में जाधव की गतिविधियों के सही स्वरूप और उसकी गिरफ्तारी के हालातों से जुड़े सवाल कायम हैं और स्वाभाविक है कि भारत को जवाब देने की जरूरत है. 
 
संपादकीय के मुताबिक, “भारत की ओर से कमजोर और असंगत जवाबों से लगता है कि जाधव से संबंधित घटनाओं को लेकर पाकिस्तान का विवरण भारत के विवरण से काफी अलग है.” संपादकीय के मुताबिक, वर्षो के अप्रमाणित आरोपों के बाद पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में भारतीय हस्तक्षेप के साक्ष्य पेश किए हैं. समाचार पत्र में कहा गया है, “अगर जाधव को एक साल पहले गिरफ्तार किया गया होता, तो पहले से ही तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों के और अधिक जटिल होने की ज्यादा संभावना थी.” 
 
समाचार पत्र के मुताबिक, पाकिस्तान के राष्ट्रीय टीवी पर एक भारतीय नागरिक को दोष स्वीकार करते दिखाए जाने पर भी भारत की ओर से ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं हुई. संपादकीय में कहा गया, “पाकिस्तान ने जांचकर्ताओं को भारत जाने की अनुमति देकर और भारत ने भी उन्हें आने और जांच करने की अनुमति देकर साबित किया है कि जाधव के मामले के कारण अन्य सभी जरूरी मुद्दे रद्द नहीं होंगे.”
 
समाचार पत्र के मुताबिक, “अगर ‘शीत युद्ध’ के चरम पर भी अमेरिका और सोवियत संघ पकड़े गए जासूसों के मुद्दों को सुलझाने में कामयाब रहे तो भारत और पाकिस्तान भी निश्चित तौर पर ऐसा कर सकते हैं.” 
 
समाचार पत्र ने कहा कि हालांकि केवल जासूसी से भी आगे बढ़कर पाकिस्तान के भीतर अशांति फैलाने के आरोप अधिक चिंतनीय हैं. संपादकीय के मुताबिक, “इस मामले में नए नियम बनाए जाने की जरूरत है.”