इस्लामाबाद. पाकिस्तान ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने वीटो के माध्यम से कश्मीर विवाद को लेकर एक प्रस्ताव पर रोक लगाया और इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के क्रियान्वयन को अवरुद्ध किया. संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोधी ने सुरक्षा परिषद में वीटो या बिना वीटो की शक्ति वाले नए सदस्यों के शामिल करने पर अपना विरोध जताया.
 
डॉन ऑनलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि फैसला लेने की प्रक्रिया में विशेषाधिकार की भूमिका सुरक्षा परिषद को अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिक व जवाबदेह बनाने के साझा लक्ष्य में बाधक होगा. उन्होंने कहा, “पाकिस्तान सुरक्षा परिषद के विस्तार का समर्थन करता है, लेकिन केवल अस्थायी श्रेणी के तहत.” 
 
लोधी ने कहा कि पाकिस्तान वीटो को एक महत्वपूर्ण मुद्दे के तौर पर देखता है, जिससे सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार के हिस्से के तौर पर निपटने की जरूरत है. उन्होंने कहा, “इसे नजरंदाज नहीं किया जा सकता. पाकिस्तान ऐसे किसी प्रस्ताव का समर्थन नहीं करता है, जिसका उद्देश्य इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर विचार को टालना है या विस्तार के लिए किसी समीक्षा प्रक्रिया के माध्यम से दूसरे सदस्यों के लिए संभावनाओं का रास्ता खोलना है.”
 
राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सुधार में लोकतंत्र, समान मौके व गैर भेदभाव जैसी 21वीं सदी के मूल्यों को नजरंदाज किया गया, तो संयुक्त राष्ट्र को एक विभाजित राष्ट्र बनाने का एक गंभीर खतरा पैदा हो सकता है.
पिछली चर्चाओं की ओर इशारा करते हुए लोधी ने कहा कि सुरक्षा परिषद के प्रभावी होने व फैसले लेने की प्रक्रिया पर अधिक जोर दिया जा रहा है.