इस्लामाबाद. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भारत-पाक के बीच हुए कारगिल युद्ध पर एक बड़ा बयान दिया है. शरीफ ने अपने बयान में कहा है कि करगिल पर कब्जा करने का प्रयास भारत की पीठ में छुरा घोपने जैसा काम था. शरीफ ने ये बात एक पाकिस्तानी चैनल पर 15 फरवरी को हुए पैनल डिस्कशन के दौरान कही.
 
बता दें कि फरवरी 1999 में भारत के तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्‍तान का दौरा कर भारत-पाकिस्‍तान संबंध सुधारने का भरसक प्रयास किया था. लेकिन उस प्रयास को उस समय गहरा झटका लगा जब पाकिस्तानी रेंजर्स ने करगिल की चौकी पर हमला कर कब्‍जा जमाने की कोशिश की.
 
‘वाजपेयी साहब ने की थी शिकायत’
वाजपेयी की दोस्ती को याद करते हुए शरीफ ने कहा कि वाजपेयी साहब ने इस बात की शिकायत की थी. उन्होंने कहा था कि जनाब एक तरफ तो लॉ ऑफ डिक्लियरेशन हो रहा है और दूसरी तरफ कारगिल का मिसएडवेंचर देकर पीठ में छुरा घोंपा गया. शरीफ ने मजबूरी जताते हुए कहा कि लेकिन मैं ये गिला किससे करूं अब. उन्होंने कहा कि जिस रब को आप मानते हैं. उस रब को हम भी मानते हैं. उनसे ही गिला करूं.
 
‘भारत की पीठ में वाकई घोंपा गया था छुरा’
शरीफ ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी साहब ठीक कहते हैं. उनकी जगह मैं भी होता तो यही कहता. उनकी पीठ में वाकई छुरा घोंपा गया था. शरीफ ने मजबूरी जताते हुए कहा कि लेकिन मैं ये शिकायत किससे करूं. शरीफ ने ये भी कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री को उस समय धोखा दिया गया जब उनके प्रयास से दोनो देशों के संबंध में सुधार हो रहे थे.
 
‘एक जैसे हैं भारत और पाक के लोग’
इसके अलावा शरीफ ने भारत और पाकिस्‍तान के लोगों के जीवन और रहन सहन को एक समान बताते हुए कहा कि ‘भारत और पाकिस्‍तान के लोग एक जैसे ही हैं. बस दोनों देशों के बीच एक सरहद है. नवाज ने कहा कि हम दोनों ही आलू गोश्‍त का लुत्‍फ एक ही अंदाज में उठाते हैं.
 
शरीफ के बुलाने पर लाहौर गए थे वाजपेयी
वाजपेयी फरवरी 1999 में शरीफ के बुलावे पर लाहौर गए थे. दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे. वह दिल्ली-लाहौर बस सर्विस की ओपनिंग सेरेमनी में वाघा बॉर्डर के रास्ते लाहौर पहुंचे थे. जहां उनका स्वागत नवाज शरीफ ने किया था.