काठमांडू. विनाशकारी भूकंप की त्रासदी झेल रहे नेपाल ने रविवार को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मदद में तेजी लाने की अपील की, इस बीच रविवार तक आपदा में मरने वालों की संख्या 7,250 हो गई. अपने सर्वाधिक विनाशकारी भूकंप से उबर रहे हिमालय की तलहटी में बसे देश में इस बीच रविवार को फिर से आए भूकंप के तीन झटकों ने एक बार फिर नेपालवासियों को दहशत में डाल दिया. त्रासदी के कारण 28 लाख लोगों को विस्थापन झेलना पड़ा है.

इस बीच नेपाल सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने की अपील की, साथ ही राहत एवं बचाव कर्मियों से अपने लिए व्यवस्थाएं खुद करने के लिए भी कहा. नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोईराला ने संयुक्त राष्ट्र के एक शीर्ष अधिकारी को मौजूदा परिस्थिति के बारे में बताया कि नेपाल पहुंच रही राहत सामग्री पर्याप्त नहीं है तथा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को त्रासदी की मार झेल रहे नेपाल की मदद में तेजी लानी चाहिए. राहत एवं बचाव कार्य में जी-जान से जुटी नेपाली सेना ने भी कहा कि मिल रही अंतर्राष्ट्रीय मदद त्रासदी से निपटने में पर्याप्त नहीं है.

गृह मंत्रालय द्वारा जारी अनुमान के मुताबिक भूकंप में 80 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 35 लाख लोगों तक तत्काल खाद्य सामग्री पहुंचाए जाने की जरूरत है. नेपाल ने जरूरत के सामानों की एक सूची भी जारी की है. यह सूची सभी राजनयिक मिशनों, संयुक्त राष्ट्र और विशेषीकृत एजेंसियों और काठमांडू में अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को भेज दी गई है. गृह मंत्रालय के अनुसार घायलों की संख्या 14,121 है. भूकंप का सर्वाधिक प्रभाव सिंधुपालचौक जिले में रहा, जहां मृतकों की संख्या (2,829) सर्वाधिक है. इसके बाद काठमांडू में 1,194, नुवाकोट में 798, गोरखा में 410, कावरे में 311 और रासुवा में 306 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है.

गृह मंत्रालय के अनुसार, 41,233 घर ध्वस्त हो चुके हैं, जबकि 149,659 घरों को भारी नुकसान पहुंचा है. भूकंप में कम से कम 10,477 सरकारी इमारतें भी ढह गईं, जबकि 14,188 इमारतें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुई हैं. अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि अब तक करीब 10 लाख लोग काठमांडू छोड़ चुके हैं. भूकंप में बच गए तथा खुले में गुजारा कर रहे लोगों को भोजन और दैनिक उपयोग के सामान प्राप्त करने में बेहद कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि बड़ी संख्या में व्यापारी भी शहर छोड़कर जा चुके हैं.

रविवार को इस बीच सार्वजनिक परिवहन शुरू हुआ और सड़क पर वाहन दिखाई पड़े. काठमांडू के न्यू रोड, बानेश्वर, कोटेश्वर और महराजगंज इलाकों में जनजीवन सामान्य होता हुआ दिखाई दिया, हालांकि भक्तपुर में अभी भी स्थिति खराब है. नेपाल सरकार ने रविवार को कहा कि बाहर से आ रहे राहत एवं बचाव कर्मियों को यहां आवास, खाद्य एवं परिवहन के लिए अपना बंदोबस्त स्वयं करना होगा. साथ ही, त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे को किसी भी तरह की क्षति से बचाने के लिए नेपाल में मानवीय सहायता लेकर पहुंच रहे भारी विमानों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है. 

इस फैसले का मतलब है कि 196 टन से अधिक वजन के विमानों को यहां उतरने की मंजूरी नहीं होगी. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि कुछ पश्चिमी देशों ने राहत सामग्री लिए हुए बड़े जेट विमानों को उतरने की मंजूरी मांगी है. नेपाल में 25 अप्रैल को आए भूकंप के बाद यहां 150 चार्टर्ड विमानों सहित 300 से अधिक बचाव उड़ाने उतर चुकी हैं. अस्पताल अभी भी घायलों से अटे पड़े हैं तथा बिस्तरों की कमी के कारण चिकित्सक खुले में उन्हें उपचार दे रहे हैं. 

एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया, “हम घायलों को निशुल्क उपचार प्रदान कर रहे हैं.” काठमांडू महानगर पालिका ने रविवार को कचरा निष्पादन कार्य भी शुरू कर दिया. इसके अलावा महानगर पालिका ने 100,200 लीटर पेयजल भी वितरित किया तथा सर्वाधिक प्रभावित इलाकों में दस्ताने और मास्क भी वितरित किए. हालांकि राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय राहत एजेंसियों के बीच समन्वय न होने के कारण राहत सामग्री के वितरण में अव्यवस्था देखी गई. इस बीच नेपाल, चीन और भारत की सुरक्षा एजेंसियां रविवार को भी मलबे में दबे जीवित लोगों को बचाने और मृत शरीरों को निकालने के कार्य में जुटी रहीं. अधिकारियों को अभी भी मलबे में दबे सैकड़ों शवों को निकालने की चिंता बनी हुई है.

IANS