इस्लामाबाद. पाकिस्तान के अखबार ‘डॉन’ का कहना है कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और इसके द्वारा किए गए पठानकोट हमले पर महज दिखावे की कार्रवाई करना ही पाकिस्तान के लिए काफी नहीं है. ‘डॉन’ का यह भी कहना है कि दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच की बातचीत, दोनों देश के बीच वास्तविक वार्ता की न तो जगह ले सकती है और न इसे लेना चाहिए. दोनों देशों के बीच बातचीत बिना किसी धमकी या भय के माहौल में होनी चाहिए.
 
अखबार पाकिस्तान सरकार की जैश के खिलाफ की गई अब तक की कार्रवाई के प्रति अपनी नाखुशी जताता रहा है. भारत का कहना है कि दो जनवरी को पठानकोट के एयरबेस पर आतंकी हमला जैश ने किया था. अखबार ने लिखा है, “पाकिस्तान में जैश के कुछ मदरसों और इसके कुछ केंद्रों को प्रतीकात्मक रूप से बंद कर देना ही काफी नहीं है.”
 
अखबार ने लिखा है, “अगर पठानकोट पर हमला करने वाले और लोगों को मारने में सफल रहे होते या हमले में कोई वायुयान क्षतिग्रस्त हो गया होता तो फिर संकट बहुत अधिक बड़ा हो सकता था. यह बिलकुल साफ है कि आतंकियों का मूल उद्देश्य अभूतपूर्व तबाही मचाना था.”
 
‘डॉन’ ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया है कि वह हाल के दिनों में सक्रिय हुए अवांछित तत्वों पर अधिक ध्यान दे. 
 
अखबार ने लिखा है, “युनाइटेड जेहाद काउंसिल प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन लोगों की निगाह में फिर से चढ़ने के लिए संकल्पित दिख रहा है. इसी सप्ताह उसने जैश पर आंशिक कार्रवाई की निंदा की है. यह निंदा पठनकोट हमले की काउंसिल द्वारा जिम्मेदारी लिए जाने के बाद आई है.”
अखबार ने पूछा है, “सैयद सलाहुद्दीन जो संकट पैदा करना चाह रहा है, उससे निपटने के लिए सरकार क्या कर रही है?” अखबार ने लिखा है, “निश्चित ही, वह दिन आ चुका है जब किसी दूसरे देश में आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी लेने वालों को और अधिक बर्दाश्त न किया जाए.”