इस्लामाबाद. अंतर्राष्ट्रीय कानूनी मामलों के एक जानकार का कहना है कि पठानकोट आतंकी हमले से जैश-ए-मुहम्मद (जेईएम) सरगना मौलाना मसूद अजहर का तार जोड़ने के मामले में भारत के पास 60 दिन से भी कम समय बचा है. भारत को इस बारे में पुख्ता सबूत इस अवधि में देने होंगे, नहीं तो मसूद अजहर कानूनी तरीके से बच निकलेगा. कहा जा रहा है कि मसूद अजहर पाकिस्तान में हिरासत में है.
 
द न्यूज इंटरनेशनल के मुताबिक, पूर्व कानून मंत्री और अंतर्राष्ट्रीय कानून के जानकार अहमर बिलाल सूफी ने कहा कि अगर भारत ने पुख्ता सबूत नहीं दिए तो अजहर रिहा हो सकता है या फिर हाईकोर्ट में अपनी हिरासत को चुनौती देकर हाफिज सईद की तरह जमानत हासिल कर सकता है.
 
हाफिज सईद को 2008 में मुंबई हमलों के बाद हिरासत में लिया गया था. उसे लाहौर हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी. सूफी ने कहा, “उस समय (मुंबई हमलों के समय) पाकिस्तान के महान्यायवादी को यह कहना पड़ा था कि भारत ने पर्याप्त सबूत नहीं दिए.”
 
पाकिस्तान में यह प्रावधान है कि किसी भी व्यक्ति को 30 दिनों तक निवारक हिरासत में रखा जा सकता है. इसे 30 दिन के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है. इस प्रावधान के हिसाब से अब भारत के पास 60 दिन से भी कम समय है. इसी अवधि में उसे पठानकोट आतंकी हमले से मसूद अजहर के संबंध के बारे में पुख्ता सबूत देने होंगे. भारत ने पाकिस्तानी सरकार को पुख्ता सबूत नहीं दिए हैं. उसने आगे की जांच के लिए सिर्फ दो मोबाइल फोन नंबर दिए हैं.
 
सूफी ने कहा, “पाकिस्तानी जांच दल भारत की यात्रा समाप्त करने के बाद इस बारे में फैसला ले सकता है कि पाकिस्तान में एफआईआर दर्ज की जाए या नहीं. जरूरी नहीं है कि एफआईआर बहुत विस्तृत हो या इसमें खास नामों का जिक्र हो.”