इस्लामाबाद. नवाज़ शरीफ सरकार पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के एक बड़े हिस्से गिलगिट-बाल्टिस्तान को पूरी तरह हड़पने की तैयारी में है. अब तक गिलगिट-बाल्टिस्तान को बाकी पीओके की तरह पाकिस्तान में ऑटोनॉमस रीजन यानी स्वायत्त क्षेत्र कहा जाता रहा है.
 
गिलगिट-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान में शामिल करने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने एक हाई पावर कमेटी बना दी है. गिलगिट बाल्टिस्तान के चीफ मिनिस्टर हाफिज हफीज़ुर रहमान के प्रवक्ता सज्जाद उल हक के मुताबिक, ‘गिलगिट-बाल्टिस्तान मामले पर हाई पावर कमेटी काम कर रही है और जल्दी ही आपको खुशखबरी मिलेगी’.
 
पाकिस्तानी संसद में दो सदस्य होंगे गिलगिट-बाल्टिस्तान सूबे से
 
पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, गिलगिट-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा घोषित करने के लिए संविधान संशोधन की तैयारी है. सूत्रों का कहना है कि गिलगिट-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का नया सूबा बनाया जाएगा और इस इलाके से दो नुमाइंदे पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में सदस्य होंगे. हालांकि उन सदस्यों की हैसियत पाकिस्तानी संसद में ऑब्जर्वर की होगी.
 
चीन के साथ इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाने के लिए ऐसा कर रहा है पाकिस्तान
 
गिलगिट-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान में शामिल करने की वजह पाकिस्तान-चाइना इकोनॉमिक कॉरिडोर है. ये कॉरिडोर गिलगिट-बाल्टिस्तान से गुजरता है और चीन विवादित इलाके में पूंजी निवेश और काम करने के लिए तैयार नहीं है. चीन की चिंताएं दूर करने के लिए ही पाकिस्तान संवैधानिक तौर पर गिलगिट-बाल्टिस्तान को अपना इलाका घोषित करने जा रहा है.
 
डोगरा राजाओं के कब्जे में रहा था गिलगिट-बाल्टिस्तान
 
गिलगिट-बाल्टिस्तान 1846 से ही जम्मू-कश्मीर के डोगरा राजाओं के कब्जे में रहा है. 1947-48 में पाकिस्तान ने कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा किया, उनमें गिलगिट-बाल्टिस्तान भी है. पाकिस्तान ने अपने कब्जे वाले कश्मीर को दो हिस्सों में बांटा, जिनमें से एक को पीओके कहा जाता है और दूसरा हिस्सा गिलगिट-बाल्टिस्तान है. 
 
पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर के इन दोनों हिस्सों को पाकिस्तान स्वायत्त क्षेत्र कहता है, जबकि हकीकत ये है कि दोनों क्षेत्रों में पाकिस्तानी सरकार और पाक आर्मी की कठपुतली सरकारें ही काम करती हैं.