नई दिल्ली. आजादी के बाद से लेकर 2014 तक हिंदुस्तान की सियासत कांग्रेस पार्टी के इर्द गिर्द घूमती रही है. इन 67 सालों में ज्यादातर वक्त तो कांग्रेस खुद ही सत्ता में रही. इसके अलावा जो कुछ भी सियासी हलचल दिखी तो वो कांग्रेस के खिलाफ विरोधियों की लामबंदी को लेकर रही.

अपना कार्यकाल पूरा करने वाली पहली गैर कांग्रेसी सरकार 1999 में बन पाई. यानि आजादी के पूरे 52 साल बाद, लेकिन 2014 के चुनावों ने देश की सियासी तस्वीर बिलकुल बदल दी. प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने वाले नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को हाशिए पर धकेल दिया.

मोदी की आंधी के आगे जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र और हरियाणा में बड़े बड़े सियासी पेड़ उखड़ गए. इस तूफान पर ब्रेक लगा तो दिल्ली में और फिर बिहार में बीजेपी की हार हुई.

अब बिहार के नतीजों से सबक लेकर करीब करीब पूरे देश में विरोधी पार्टियां पीएम मोदी के खिलाफ हाथ मिलाने की कवायद में जुट गई हैं. तो क्या पीएम मोदी देश की राजनीति की नई धुरी बन गए हैं ? आज इन्हीं सवालों पर होगी बड़ी बहस.

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