नई दिल्ली. 10 साल बाद भारत के प्रधानमंत्री ब्रिटेन दौरे पर हैं. लंदन में जिस तरह से ब्रिटिश सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए पलक-पांवड़े बिछाए हैं, वो अभूतपूर्व माना जा रहा है. उम्मीद जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे के दौरान भारत और ब्रिटेन के बीच करीब एक हज़ार करोड़ के कारोबारी समझौते हो सकते हैं.
 
इसके अलावा कूटनीति के लिहाज से भी मोदी का ब्रिटेन दौरा महत्वपूर्ण है, क्योंकि ब्रिटेन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और भारत सुरक्षा परिषद की परमानेंट सदस्यता का दावेदार. रणनीतिक लिहाज से भी मोदी का ब्रिटेन दौरा काफी मायने रखता है, क्योंकि आतंक के खिलाफ जंग के लिए मोदी ब्रिटेन को पार्टनर बनाना चाहते हैं इसीलिए वह ब्रिटेन में दाऊद इब्राहिम के ठिकानों और खालिस्तानी उग्रवादियों से जुड़ा डोजियर भी लेकर गए हैं.
 
जानकार मानते हैं कि इस वक्त भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था का साथ मिलना ब्रिटेन के लिए भी जरूरी है. अब तक भारत और ब्रिटेन के कूटनीतिक रिश्तों में कभी नरमी, तो कभी गरमी वाली स्थिति रही है. ऐसे में ये बड़ी बहस का मुद्दा है कि क्या ब्रिटेन में मोदी की कूटनीति कामयाब रहेगी.
 
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