नई दिल्ली. पाकिस्तान से लौटी गीता करीब 13 साल तक ईदी फाउंडेशन में रही. बड़ी मुश्किल से वो अपने देश लौटी, लेकिन परिवार का साथ उसे अब तक नसीब नहीं हुआ है. जिस परिवार को गीता ने तस्वीरों में थोड़ा-बहुत पहचाना था, उसे सामने देखकर वो अनजान बन गई.

गीता की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट का नतीजा आता, उससे पहले ही तीन और परिवार सामने आ गए हैं और सबका यही दावा है कि गीता हमारी बेटी है, इसलिए हमारा भी डीएनए टेस्ट कराओ.

गीता अब इंदौर में मूक-बधिर हॉस्टल में है और देश भर में बड़ी बहस चल रही है कि आखिर गीता की पहचान क्या है ? वो सहरसा की हीरा है, अलीगढ़ की डॉली है, बोकारो की कोकिया है या फिर प्रतापगढ़ की सविता. इन्हीं सवालों पर होगी बड़ी बहस

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