नई दिल्ली. संसद के दोनों सदनों में ही लगातार हंगामा जारी है. संसद में लगातार कामकाज ठप होने के बाद अब नो वर्क नो पे का मुद्दा भी गरमाने लगा है. सांसदों के हंगामे के चलते हो रहे नुकसान के चलते सुझाव आया है कि सांसदों को भी काम नहीं तो वेतन नहीं के तर्ज पर हंगामे के दिन वेतन न दिया जाए. इंडिया न्यूज़ के विशेष कार्यक्रम टूनाइट विद दीपक चौरसिया में आज इसी पर चर्चा की गयी. 

इस चर्चा में कांग्रेस प्रवक्ता राज बब्बर, पर्यटन राज्यमंत्री महेश शर्मा, पूर्व राज्यसभा सांसद मोहम्मद अदीब, शिवसेना सांसद अरविंद सावंत और सीपीएम सांसद बदरुद्दोजा खान मौजूद रहे. आपको बता दें कि महेश शर्मा ने ही संसद में ये मामला उठाया है. महेश शर्मा ने कहा कि अगर मजदूर काम नहीं करता है तो उसे वेतन नहीं मिलता है. मैं निजी तौर पर ये कहूंगा कि अगर मैं काम नहीं करता हूं तो मैं वेतन नहीं लेना चाहूंगा.

इस पर सभी पार्टियों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है. बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा कि सरकार को अड़ियल और तानाशाही वाला रवैया छोड़ना पड़ेगा. बीजेपी को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए. नो वर्क, नो पे पर मायावती ने कहा कि सांसद तो आ रहे हैं, हाउस नहीं चल रहा है इसके लिए सरकार जिम्मेदार है.

जबकि टीएमसी सांसद सौगातो रॉय ने कहा कि ये बहुत शर्मनाक है, जैसे सांसद सिर्फ 2 हज़ार का भत्ता लेने ही आते हैं. संसद में हम तो काम रोक नहीं रहे हैं. सरकार को विपक्ष तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए. ये ज़िम्मेदारी तो सरकार की है कि वो संसद ठीक से चलाए. जेडीयू सांसद केसी त्यागी ने कहा कि ये काम (नो वर्क नो पे) महेश शर्मा का नहीं, वेतन समिति का है जिसका मैं सदस्य हूं. मैं इससे सहमत हूं. मैं सांसदों के फाइव स्टार होटल मे रुकने के विरुद्ध हूं.