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इन आंकड़ों से समझें कैसे NDA के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति बनना है तय !

इन आंकड़ों से समझें कैसे NDA के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति बनना है तय !

| Updated: Monday, July 17, 2017 - 23:43
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NDA candidate Ramnath Kovind May next president of india

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इन आंकड़ों से समझें कैसे NDA के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति बनना है तय !NDA candidate Ramnath Kovind May next president of indiaMonday, July 17, 2017 - 23:43+05:30
नई दिल्ली: राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज वोटिंग हो गई और एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति बनना तय भी माना जा रहा है और साथ ही साथ उपराष्ट्रपति पद के लिए बीजेपी ने वेंकैया नायडू को उपराष्ट्रपति की रेस में भी उतार दिया और उनके भी जीतने की संभावनाएं बेहद मजबूत हैं.
 
हिंदुस्तान में लोकतांत्रिक व्यवस्था में दलगत राजनीति का एक बड़ा उत्थान है. अपने बनने के सिर्फ 37 साल में बीजेपी ने वो मुकाम हासिल किया जो हिंदुस्तान की राजनीति में एक समय में सोचा भी नहीं जा सकता था. महज 40 प्रतिशत वोट के साथ बीजेपी ने पूरे राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव को अपने पक्ष में मोड़ दिया.
 
 
अगर कोविंद राष्ट्पति बनते है तो ये बीजेपी की सबसे बड़ी सियासी जीत कहलाएंगी लेकिन ये कमाल हुआ कैसे. क्या गणित हुई राष्ट्रपति चुनाव को लेकर और कैसे सियासी विरोध भी बीजेपी को अपना राष्ट्रपति बनाने से नहीं रोक सका.
 
देश में राष्ट्रपति का चुनाव बेहद अहम होता है. किसी भी दल को अपनी पसंद का राष्ट्रपति बनाने के लिए 50 प्रतिशत यानि कुल 5 लाख 49 हजार 442 वोटो की जरुरत होती है और राष्ट्रपति के चुनाव में कुल वोट है 10 लाख 98 हजार 903. इन वोटों में 5,49,408 सांसदों के और 5,49,495 विधायकों के वोट हैं.
 
 
बीजेपी के पास कुल वोट है- 4 लाख 42 हजार 117 
यानि बीजेपी अकेले राष्ट्रपति नहीं बना सकती थी क्योकि उसे 50 प्रतिशत वोट के लिए 1 लाख 7 325 वोट चाहिए थे तब जाकर तो मुकाबला बराबरी का होता लेकिन देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की जुगलबंदी ने कोविंद के समंर्थन में 60 प्रतिशत वोट को अपने पक्ष में ला खड़ा किया. यानि जरुरत से 10 प्रतिशत ज्यादा.
 
बीजेपी के साथ एनडीए के घटक दलों के वोट को मिला ले तो तेलगुदेशम पार्टी के 3 प्रतिशत, शिवसेना के 2 प्रतिशत और अन्य के 3 प्रतिशत मिलाकर. कुल 48 प्रतिशत वोट होते है. लेकिन बीजेपी ने अपने उम्मीदवार के जरिए 12 प्रतिशत वोट को मैनेज कर लिया. 
यानि 5 प्रतिशत वोट वाली अन्नाद्रमुक, 2 प्रतिशत वोट वाली जेडीयू, 2 प्रतिशत वोट वाली टीआरएस, 3 प्रतिशत वोट वाली बीजू जनता दल को बीजेपी ने अपने पाले में कर लिया. साथ ही 9 प्रतिशत ऐसे विधायक और सांसद जो निर्दलीय,अन्य या फिर स्वतंत्र थे उन्हे भी बीजेपी ने मैनेज कर लिया.
 
 
राम नाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाना दरअसल बीजेपी का एक मास्टर स्ट्रोक था. एक ऐसा दांव जिसने विपक्ष की सारी गणित को एक ही झटके में साफ कर दिया. राम नाथ कोविंद एक दलित चेहरा है और दलित के नाम पर कई दल तो चाहकर भी बीजेपी से अलग नहीं खड़े हो पाएं.
जिनमें जेडीयू पहला नाम थी हालांकि बाद में विरोधियों को भी मीरा कुमार के तौर पर दलित चेहरे को राष्ट्रपति के पद की रेस में लाना पड़ा लेकिन राजनीति में जैसा अक्सर होता है कि जिसने पहला दांव खेला, जीत उसी की होती है.
 
कोविंद यूपी से आते हैं और 2019 लोकसभा चुनावों में यूपी अहम भूमिका निभाएगा. अब समझिए क्यों कोई दल दलित चेहरे का विरोध करने का खतरा मोल नहीं लेना चाहता. 2011 की जनगणना के मुताबिक पूरे देश में दलितों की आबादी 16.6 फीसदी है यानि सवा अरब में 20 करोड़ 14 लाख. सबसे ज्यादा दलित आबादी उत्तर प्रदेश में है जो लगभग 4 .13 करोड़ हैं.
 
 
वहीं बिहार में दलित आबादी 1.65 करोड़ के करीब है. पश्चिम बंगाल में दलित आबादी 2.14 करोड़ के करीब है तो हरियाणा में 51 लाख और पंजाब में ये लगभग 88 लाख के करीब है. महाराष्ट्र में भी 1.32 करोड़ दलित आबादी है तो राजस्थान में ये 1.22 करोड़ के करीब है. जबकि पीएम मोदी के गृहराज्य गुजरात में दलित आबादी 40 लाख के करीब है. 
 
उत्तर प्रदेश और बिहार के दलित वोटरों की गिनती मिला दें तो देश की कुल आबादी का लगभग 40 फीसदी दलित इन्हीं दोनों राज्यों में रहता है. ऐसे में साफ सुधरी छवि वाले कोविंद को राष्ट्रपति बनाकर बीजेपी ने इन दोनों राज्यों को 2019 चुनावों के मद्देनजर काफी हद तक साध लिया है. इस कदम से गुजरात विधानसभा के आगामी चुनावों में भी दलित वोट बैंक पर बड़ी सेंध लगाई जा सकती है.
 
(वीडियो में देखें पूरा शो)
First Published | Monday, July 17, 2017 - 23:43
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Web Title: NDA candidate Ramnath Kovind May next president of india
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