मुंबई. महाराष्ट्र सरकार ने ऐसे शिक्षण संस्थानों को स्कूलों के तौर पर मान्यता देने से मना कर दिया है, जो विज्ञान, गणित तथा सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों की शिक्षा नहीं देते हैं. सरकार के इस फैसले के बाद ऑल इंडिया मजलिस- ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ( AIMIM ) नेता असादुद्दीन ओवैसी ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए इसे असंवैधानिक कदम बताया है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार जानबूझकर अल्पसंख्यकों को निशाना बना रही है.

इंडिया न्यूज़ के विशेष शो टूनाइट विद दीपक चौरसिया में आज सरकार के इसी कदम पर चर्चा की गयी. इस चर्चा में बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा, कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक, मौलाना अथर हुसैन देहलवी और विजय शंकर तिवारी मौजूद रहे.  आपको बता दें कि बीजेपी-नीत देवेंद्र फडणवीस सरकार ने इससे पहले राज्य में चल रहे मदरसों से कहा था कि यदि वे सरकारी अनुदान पाते रहना चाहते हैं तो वे अपने पाठ्यक्रम में औपचारिक स्कूली विषयों को भी शामिल करें.

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में यूपी, एमपी या पश्चिम बंगाल के तर्ज़ पर मदरसा बोर्ड नहीं है. महाराष्ट्र के किसी सरकार ने मदरसों को स्कूल/पाठशाला नहीं माना. अब तक की सभी सरकारें मदरसों को प्रचलित शिक्षा पद्धति के बाहर ही माना है. महाराष्ट्र में साल 2013 में की तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने मदरसा आधुनिकीकरण योजना शुरू की थी, तब भी उस सरकार ने भी मदरसों को स्कूल नहीं माना. राज्य में फिलहाल करीब 1900 मदरसे हैं, जिनमें लगभग दो लाख बच्चे पढ़ रहे हैं. महाराष्ट्र सरकार चार जून को पूरे राज्य में उन बच्चों का हेड काउंट कराएगी जो बच्चे प्रचलित स्कूल व्यवस्था में नहीं पढ़ते.

एजेंसी इनपुट भी