नई दिल्ली. दिल्‍ली के कानून मंत्री जितेंद्र तोमर की जमानत अर्जी साकेत कोर्ट ने खारिज कर दिया है. अदालत ने तोमर को 4 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है. पुलिस ने कोर्ट से तोमर की पांच दिन की हिरासत मांगी थी. पुलिस ने कहा था, ‘हमने अपनी जांच में जितेंद्र सिंह तोमर की बीएससी और कानून की डिग्री को फर्जी पाया.’

इंडिया न्यूज़ के स्पेशल शो टूनाईट विद दीपक चौरसिया में आज दिल्ली पुलिस की इस सक्रियता और तोमर की डिग्रियों और झूठ पर चर्चा की गयी. चर्चा में आप की तरफ से अलका लांबा और बीजेपी की तरफ से विजय जॉली मौजूद रहे. दरसल आप पार्टी के नेता संजय सिंह ने मंगलवार सुबह ट्वीट करके जानकारी दी थी कि दिल्ली के कानून मंत्री जितेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है. दिल्ली सरकार इसे बदले की कार्रवाई के तौर पर देख रही है. जितेंद्र तोमर को हौजखास थाने में ले जाया गया जहां से पुलिस उन्हें वसंत विहार थाने ले गई है. दरअसल यह गिरफ्तारी बार काउंसिल की शिकायत पर की गई है. थाने में पूछताछ के बाद उन्हें साकेत कोर्ट में पेश किया गया.

इन धाराओं के तहत तोमर हुए गिरफ्तार
धारा 420: धोखाधड़ी, 7 साल तक की सज़ा का प्रावधान
धारा 467: जालसाज़ी, 10 साल तक की सज़ा और जुर्माना
धारा 468: धोखा देने के इरादे से जालसाज़ी, 7 साल तक की सज़ा और जुर्माना
धारा 120 बी: आपराधिक साज़िश

पुलिस ने कहा तोमर जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे
आपको बता दें कि पुलिस ने कोर्ट में कहा है कि तोमर जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे इसलिए गिरफ़्तारी ज़रूरी हो गयी थी. इसके लिए पुलिस को किसी इजाज़त की ज़रूरत नहीं है. अभी दिल्ली विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा है. पुलिस कमिश्नर  बीएस बस्सी से इस बारे में जब पूछा गया तो उनका कहना था कि वह फिलहाल इस मामले में कुछ नहीं जानते और जल्द ही इस पर बात करेंगे. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि दिल्ली के कानून मंत्री जितेंद्र तोमर की गिरफ्तारी में गृह मंत्रालय का कोई हाथ नहीं है. उन्होंने साफतौर पर कहा कि गृह मंत्रालय किसी की गिरफ्तारी का आदेश नहीं देता. संजय सिंह के मुताबिक, तोमर को न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही पूर्व सूचना दी गई है. यहां बता दें कि दिल्ली के कानून मंत्री को फर्जी सर्टिफिकेट के मामले में गिरफ्तार किया गया है.

मंत्रिपद पर मंडराया खतरा
दिल्ली के कानून मंत्री की गिरफ्तारी पर वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी ने कहा है कि ये गिरफ्तारी दिल्ली सरकार को बदनाम करने की कोशिश है. तुलसी ने कहा कि अगर 24 घंटे से ज्यादा गिरफ्तारी रही तो तोमर पद पर नहीं बने रह सकते. हालांकि तुलसी ने कहा- मंत्री कहीं भाग नहीं रहे थे इसलिए कोर्ट की इजाजत लेकर भी गिरफ़्तारी की जा सकती थी.

IANS से भी इनपुट