नई दिल्ली. एक अहम फैसले में मीडिया को नियंत्रित करने के लिए जारी केजरीवाल सरकार के सर्कुलर पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. 6 मई को जारी इस सर्कुलर में कहा गया था कि अगर मुख्यमंत्री या उनकी सरकार के ख़िलाफ़ कोई आपत्तिजनक बात कही जाती है तो उसे आपराधिक मानहानि का मामला मानकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल के दोहरे रवैये पर सवाल उठाए. अदालत ने कहा कि एक तरफ़ केजरीवाल अपने ख़िलाफ़ मानहानि के मामलों को चुनौती देते हैं और इसे बोलने की आज़ादी के अधिकार का हनन बताते हैं. दूसरी तरफ़ उनकी सरकार मानहानि के मुकदमे की बात करती है. इतने संवेदनशील मसले पर उनके रुख में अंतर्विरोध दिखता है.

इसमें संदेह नहीं कि सुप्रीम कोर्ट में केजरीवाल सरकार की ये एक बड़ी हार है. फैसले के बाद वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि केजरीवाल सरकार के रुख में अंतर्रविरोध था और इसकी वजह से कोर्ट ने फटकार लगाई है. उन्होंने कहा, ‘एक तरफ आप कानून में प्रावधान को गैर-संवैधानिक डिक्लेयर करने के लिए याचिका फाइल करेंगे, वहीं दूसरी तरफ अपनी ही सरकार के ज़रिये उसी प्रावधान के तहत मुकदमा चलाने की बात करेंगे. तो ये लताड़ तो लगनी ही है.’

छह मई को जैसे ही ये सर्कुलर आया, बड़े पैमाने पर इसका विरोध हो गया था. अब सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद केजरीवाल के विरोधियों को उनपर निशाना साधने का मौका मिल गया. बीजेपी नेता सतीश उपाध्याय ने कहा, ‘हम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं. कोर्ट ने ठीक कहा है. इस तुगलकी फैसले पर रोक लगनी चाहिए.’ उधर कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा कि केजरीवाल सरकार का सर्कुलर सेंशरशिप को प्रेरित करने वाला था. ये लोकतंत्र की जड़ें काटने वाला सर्कुलर था.’

अब IPC की धारा 499 और 500 यानी आपराधिक मानहानी का प्रावधान कानून में बने रहे या नहीं इस सवाल पर चल रही कानूनी बहस पर अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी जब कोर्ट इस मसले पर केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और सभी याचिकाकर्ताओं की दलीलों को सुनेगा.

IANS