नई दिल्ली. पठानकोट हमले की जांच करने लिए पाकिस्तान की जेआईटी 27 मार्च को भारत आई थी. भारतीय जांच एजेंसियों ने वो तमाम सबूत पेश किए, जिनसे साबित होता था कि आतंकी हमले में जैश ए मुहम्मद और उसके सरगना मसूद अज़हर का हाथ है.

भारतीय एजेंसियों के सामने पाकिस्तान की जेआईटी ने बड़ी गंभीरता दिखाई, लेकिन पाकिस्तान लौटते ही सब अपने असली रंग में आ गए. पाकिस्तानी मीडिया खबर छाप चुका है कि भारत ने जेआईटी को ठीक से जांच नहीं करने दिया और पाकिस्तान के हाई कमिश्नर कह रहे हैं कि एनआईए की टीम पाकिस्तान नहीं जाएगी.

पाकिस्तान की वादाखिलाफी पर भारतीय विदेश मंत्रालय बयान जारी कर चुका है. गृह मंत्रालय में इस पर हाई लेवल मीटिंग भी हो चुकी है. अब ये बड़ी बहस का मुद्दा है कि पठानकोट मामले में भी क्यों पलटा पाकिस्तान ? पाकिस्तान की नीयत खराब है या भारत की नीति ?

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