नई दिल्ली. शनि शिंगणापुर और सबरीमाला के बाद मुंबई की हाजी अली दरगाह में भी महिलाओं पर पाबंदी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. ट्रस्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में पहले ही याचिका दायर है.
 
लेकिन अब महिलाएं इस फैसले के खिलाफ सड़कों पर भी उतरने लगी हैं. ऐसे में ये बहस बड़ी हो गई है कि क्या हिंदू और मुसलमान दोनों धर्मों में आधी आबादी के साथ एक तरह का ‘धार्मिक भेदभाव’ किया जा रहा है?
 
शनि चबूतरे पर जाकर शनिदेव को तेल अर्पित करने के लिए चल रहा भूमाता रणरागिनी ब्रिगेड का आंदोलन अब बड़ा मुद्दा बन गया है. मंदिर में प्रवेश के नियमों में बदलाव की मुहिम का नेतृत्व कर रहीं कार्यकर्ता तृप्ति देसाई का कहना है, “जब पुरुष वहां जाते हैं, तो सब ठीक है, लेकिन महिलाओं के जाने से वह (मंदिर) अपवित्र हो जाता है…?”
 
महिलाओं के इस मंदिर में प्रवेश को लेकर लगे प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन और अभियान पिछले साल नवंबर में शुरू हुए थे, जब एक महिला पूजा करने के लिए खुले प्लेटफॉर्म तक पहुंच गई थी. बाद में पुजारियों ने उस स्थान का दूध तथा तेल से ‘शुद्धिकरण’ किया था.
 
इंडिया न्यूज के खास शो ‘बड़ी बहस’ में इन्हीं सवालों पर होगी चर्चा.
 
 
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