नई दिल्ली. भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे के आंदोलन से पैदा हुई आम आदमी पार्टी की तीसरी वर्षगांठ बवाल और सवाल के साए में गुजरी. सड़कों पर कांग्रेस और बीजेपी ने अलग-अलग मुद्दों पर बवाल किया, जबकि स्थापना दिवस के दिन आम आदमी पार्टी के विधायक अखिलेश त्रिपाठी को दंगा भड़काने के दो साल पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया.
 
अन्ना हजारे ने तो पार्टी बनने से पहले ही खुद को अरविंद केजरीवाल से अलग कर लिया था और जो बड़े चेहरे पार्टी की बुनियाद रखने वालों में शामिल थे, उनमें से ज्यादातर अब पार्टी से बाहर हो चुके हैं. ईमानदार लोगों को राजनीति में आगे बढ़ाने का दावा करने वाली पार्टी के दो दर्जन विधायकों पर क्रिमिनल केस चल रहे हैं और इनमें से 5 तो गिरफ्तार भी हो चुके हैं.
 
 केजरीवाल की पार्टी ने खंभों पर चढ़कर उम्मीदों को जिस ऊंचाई तक पहुंचाया था, अब वही उम्मीदें सवाल बन गई हैं कि तीन सालों में आप ने क्या खोया, क्या पाया? आप भी कहीं आम पार्टी तो नहीं बन गई.
 
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