नई दिल्ली. दिल्ली विश्वविद्यालय से ओपन कोर्स करने वाले ग्रेजुएट और अंडर ग्रेजुएट छात्र-छात्राओं के लिए एक बुरी खबर है. दिल्ली यूनिवर्सिटी ने एक नोटिस जारी किया है. नोटिस के अनुसार विश्वविद्यालय की केंद्रीय पुस्तकालय का स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) के छात्रों को उपयोग नहीं कर पाएंगे. वहीं विश्वविद्यालय के इस नोटिस के बाद डीयू से ओपन कोर्स कर रहे 2 लाख से ज्यादा छात्रों ने इस भेदभाव पूर्ण करार देते हुए निराशा जताई है.

एसओएल जिसे पहले स्कूल ऑफ कोरसपोन्डेंस कोर्स और कंटिन्यूइंग एजुकेशन के रूप में जाना जाता था, हर साल डिस्टेंस मोड में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम आयोजित करता है. इसकी कक्षाएं वीकेंड में आयोजित की जाती हैं, और विभिन्न कॉलेजों को इसके केन्द्रों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

विश्वविद्यालय ने ये नोटिस पुस्तकालय के दरवाजे पर चिपकाया है. नोटिस के अनुसार एसओएल छात्र-छात्राओं को लाइब्रेरी में आने की अनुमति नहीं है. हालांकि नोटिस पर इसे जारी करने वाले अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं. इस नोटिस के बारे में ओपन स्कूल्स की छात्र विंग क्रांतिकारी युवा संगठन के सदस्य हरीश गौतम का कहना है कि ओपन कोर्स करने वाले छात्रों के पास इस लाइब्रेरी के अलावा अन्य अध्ययन केंद्रों पर पुस्तकालय की सुविधाएं नहीं हैं. ओपन कोर्स करने वाले छात्र अब इस लाइब्रेरी का भी इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे, ये तो उनके साथ नाइंसाफी है.

वहीं इस मामले में विश्वविद्यालय के लाइब्रेरियन का कहना है डीवी सिंह का कहना है कि एसओएल डीयू का हिस्सा नहीं है. एसओएल एक अलग स्वात्य संस्था का हिस्सा है जिनकी अलग लाइब्रेरी है. उन्होंने कहा कि इन्हें केंद्रीय लाइब्रेरी में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती है. लाइब्रेरियन के आरोप लगाया कि एसओएल में एडमिशन लेने वाले अधिकतर छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए एसओएल में एनरोल कराते हैं. वो डीयू का लाइब्रेरी की पुस्तकों के प्रयोग के लिए ऐसा करते हैं.

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