मुंबई. प्रख्यात अभिनेत्री शबाना आजमी का कहना है कि असहिष्णुता के विरोध में कई फिल्मकारों का पुरस्कार लौटाना भविष्य के लिए बड़ी चीजों का संकेत है. शबाना ने ट्वीट किया, “पुरस्कार लौटाने वाले कलाकार अपने काम के जरिए भी अपनी चिंता जाहिर करेंगे, लेकिन इसके लिए किताबें लिखने और फिल्म बनाने में समय लगेगा. पुरस्कार लौटाना सांकेतिक है, जो ध्यान आकर्षित करता है. उनकी आलोचना करने की बजाय उनके कदम के संदेश को समझें.”
 
पिछले सप्ताह गणेश विस्पुते, हरीशचंद्र थोराट, येशु पाटिल, वसंत पटनाकर, उर्मिला पवार और मुकुंद काले जैसे कई प्रख्यात लेखकों ने सरकार की ओर से मिले अपने कई पुरस्कार लौटा दिए.
 
 
कुछ प्रख्यात फिल्मकारों ने भी अपने राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान लौटाने की मुंबई में घोषणा की थी. इनमें आनंद पटवर्धन, दीपांकर बनर्जी, परेश कामदार, निष्ठा जैन, हर्षवर्धन कुलकर्णी, हरि नायर शामिल हैं.
 
इन फिल्मकारों ने भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) के छात्रों के समर्थन में यह कदम उठाया, जो अभिनेता व भाजपा नेता गजेंद्र चौहान को संस्थान का अध्यक्ष बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं.