भोपाल. सरहद भटककर पाकिस्तान पहुंची हिंदुस्तान की गीता आज अपने वतन भारत लौट आई है. हालांकि पाकिस्तान से भटककर हिंदुस्तान आए 14 साल के रमजान को अब तक अपने वतन लौटने का इंतज़ार है. कराची में रहने वाले रमजान की बड़ी बहन जौहरा बताती हैं कि रमजान के दादा की तबियत बहुत खराब है. पोते के इंतजार में अंतिम सांसें गिन रहे हैं. डॉक्टर ने जवाब दे दिया है, उन्हें पोते से मिलने की आस ने जिंदा रखा है. पोता रमजान अपने दादा जी से मिलने के लिए भारत से मदद के इंतजार में है. 
 
रमजान कराची का है रहने वाला
भोपाल की एक संस्था के मुताबिक, रमजान करांची का रहने वाला है. वो अपनी सौतेली मां की प्रताड़ना से तंग आकर गलती से सरहद पार कर भारत आ गया था. अब रमजान चाहता है कि जिस प्लेन से गीता हिंदुस्तान आ रही है, उसी प्लेन से उसे पाकिस्तान भेज दिया जाए. 14 साल का रमजान कराची की मूसा कॉलोनी में मां रजिया बेगम और पिता मोहम्मद ताजउल मुल्क के साथ रहता है. रमजान के पिता के तलाक के बाद उन्होंने दूसरी शादी कर ली. जब सौतेली मां को बेटी हुई तो उसने रमजान को परेशान करना शुरू कर दिया. उसकी सौतेली मां ने उस पर चोरी का इल्जाम लगा दिया. तब वो अपनी असली मां को खोजने कराची जाने के लिए निकला और भटककर इंडिया आ गया. वो बांग्लादेश से अगरतला, कोलकाता, रांची और दिल्ली होते हुए जब भोपाल आया, तो जीआरपी ने उसे अक्टूबर 2013 में भोपाल स्टेशन पर पकड़ा. तब उसने अपना पता रांची का बताया था.
 
 
सोशल मीडिया के जरिए खोजने की शुरू हुई मुहिम 
रमजान ने भोपाल में चाइल्ड लाइन को बताया कि वह कराची के मूसा कॉलोनी का रहने वाला है तो सोशल मीडिया के जरिए उसके घर को तलाशने की मुहिम शुरू हुई. जब उसे वापस पाकिस्तान भेजने की पहल शुरू हुई तो पता चला कि इसमें भारी दिक्कत है. भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में उसके जन्म से संबंधित कागजात न होने की वजह से वीजा की अर्जी भारत के विदेश मंत्रालय ने खारिज कर दी. अब पाकिस्तान में उसकी मां बहुत परेशान है.
 
पाकिस्तान में मौजूद मां रजिया और बहन जोहरा से बात करके वो घंटों रोता है. उसके चेहरे पर हर समय उदासी छाई रहती है और उसके दादा उसको देखने के लिए अंतिम सांसें गिन रहे हैं. रमजान ने चौथी तक पढ़ाई की है. फरवरी 2015 में जब उसका आधार कार्ड बन रहा था, तब पता चला कि वह पाकिस्तानी है. इसके बाद इंटेलिजेंस, सीआईडी और आईबी को सूचना दी गई. शुरू में लगा कि कहीं यह पाकिस्तान का जासूस तो नहीं, लेकिन बाद में यह संभावना खारिज हो गई. उसके बाद माता-पिता को खोजने की कोशिश शुरू हुई.