नई दिल्ली. कला जगत के प्रतिष्ठित नाम मक़बूल फिदा हुसैन की आज100वीं वर्षगांठ है और इस मौके पर  Google Doodle ने इस मशहूर चित्रकार को रंग-बिरंगे अंदाज़ में याद किया है. अपने ही देश भारत में काफी हद तक विवादों में घिरे रहने वाले हुसैन की पेटिंग दुनिया भर में कला प्रेमियों की पसंदीदा रही हैं. 
 
मकबूल को कहा जाता था ‘हिंदुस्तानी पिकासो’
कला जगत के बाहर आम लोगों के बीच हुसैन की पहचान माधुरी दीक्षित के एक ऐसे प्रशंसक के रूप में रही जिन्होंने इस नायिका की फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ अनगिनत बार देखी थी. हालांकि हुसैन की कला अपने आप में जुदा थी लेकिन अक्सर उन्हें ‘हिंदुस्तान का पिकासो’ कह दिया जाता था. घोड़ों के प्रति इस कलाकार का प्रेम जग ज़ाहिर था जो उनकी पेंटिंग में भी साफ तौर पर दिखाई देता था लेकिन इसके साथ ही अपनी चित्रकला में हिंदू देवी-देवताओं की व्याख्या हुसैन के लिए भारत में काफी मुसीबत का कारण बनी रही. हुसैन की बनाई तस्वीरों में भारत माता और हिंदु देवी देवता को नग्न अवस्था में दिखाया गया जिसे लेकर हिंदु संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई. 
 
हुसैन को छोड़ना पड़ा था देश
आखिरी कुछ सालों में हुसैन के प्रति हिंदु संगठनों का विरोध इतना ज्यादा बढ़ गया कि इस कलाकार ने क़तर की नागरिकता हासिल कर ली और 2010 में अपने भारतीय पासपोर्ट का समर्पण कर दिया. हालांकि 2011 में एक इंटरव्यू में हुसैन ने साफ किया था कि उन्हें हिंदुस्तान से हमेशा मोहब्बत रहेगी और उन्हें भारत की प्रजातंत्र व्यवस्था पर गर्व है.  वैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 40 के दशक से ही हुसैन ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया था. 1947 में वह कलाकारों के एक प्रगतिवादी संगठन का हिस्सा बन गए थे जिसका मकसद बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट द्वारा स्थापित राष्ट्रवादी परंपरा को तोड़कर भारतीय कला की एक नई पहचान स्थापित करना था.
 
कई पुरस्कारों से नवाजे गए थे हुसैन
पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से नवाज़े जा चुके हुसैन की महाभारत केंद्रित पेंटिंग ‘Battle of Ganga and Jamuna: Mahabharata 12’ को 2008 में 10 करोड़ 60 लाख अमेरिकी डॉलर में खरीदी गई. इसके साथ ही हुसैन की इस पेंटिंग ने दुनिया के मशहूर कला केंद्र क्रिस्टी के दक्षिण एशियाई मॉडर्न और समकालीन कला की निलामी में विश्व रिकॉर्ड बनाया.  2011 में लंदन के एक अस्पताल में फेफड़े में तकलीफ के बाद हुसैन की मृत्यु हो गई.