औरंगाबाद. बिहार में ही नहीं देशभर में छठ पूजा की गूंज है. लोग इस अवसर पर अपने घर पर जाना शुरू कर दिया है. छठ 2017 के शुभ मौके पर औरंगाबाद से दूर देओ में 8वीं सदी में बना देव सूर्य मंदिर की तैयारियां सबसे खास होती है. इस मंदिर का विशेष महत्व  है. यहां हर साल छठ मैया की पूजा के लिए लाखों लोग जुड़ते हैं. इस बार छठ उत्सव में देव सूर्य मंदिर में करीब 10 लाख लोग सूर्य को अर्घ्य और डूबकी लगाने जुड़ेंगे. दिवाली के 6 दिन बाद छठ महापर्व आता है. चार दिन का तक चलने वाला ये पर्व 24 तारीख से शुरू होगा. लगातार 36 घंटे व्रत कर 27 अक्टूबर को भोर का अर्घ्य देकर ये व्रत संपन्न होगा.
 
देओ में भगवान सूर्य देव का प्रसिद्ध मंदिर है. छठ पूजा के दौरान लोग यहां इकट्ठा होते हैं.  यहां छठ का त्योहार मनाते हैं. भीड़ को देखते हुए सैंकड़ों पुलिस वाले भी भक्तों की सुरक्षा में मौजूद रहते हैं. देओ के भगवान सूर्य देव के इस मंदिर को बहुत खास माना जाता है. मान्यता है कि इस मंदिर को स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने बनवाया था. ये मंदिर 8 वीं सदी यानि की डेढ़ लाख साल से भी ज्यादा पुराना मंदिर है. इस मंदिर की कलाकारी भी विश्वविख्यात है. काले पत्थरों को तराश कर शानदार शिल्प से इस मंदिर को बनवाया गया है. 
 
बता दें इस बार छठ पर्व 24 अक्टूबर से शुरू होगा. 24 अक्टूबर को नहाय खाय है. 25 तारीख को खरना 26 तारीख को सांझ का अर्ध्य और 27 तारीख को भोर का अर्ध्य  है. कहा जाता है कि देवासुर लड़ाई में जब देवता हार गए तो देव माता अदिति ने पुत्र प्राप्ति के लिए देव के जंगलों में मैया छठी की पूजा अर्चना की थी. इस पूजा से खुश होकर छठी मैया ने आदित्य को पुत्र को पुत्र दिया और उसके बाद छठी मैया की देन इस पुत्र ने सभी देवतागण को जीत दिलाई. तभी से मान्यता चली आ रही कि छठ मैया की पूजा-अर्चना करने से सभी दुखों का निवारण होता है.