नई दिल्लीः पटाखा बैन पर दिल्ली-NCR में रहस्यमयी पोस्टर देखने को मिले हैं. पोस्टरों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पटाखों को बैन करने के फैसले पर सवाल उठाए गए हैं. ये पोस्टर किसने चिपकाए, यह पता नहीं चल पाया है. पोस्टरों में विरोध करने वाले के नाम की जगह ‘दिल्ली की जनता’ लिखा हुआ है. ऐसा माना जा रहा है कि हिंदूवादी संगठन पटाखा बैन को परंपरा से जोड़ते हुए सवाल उठा रहे हैं. दिल्ली में यह पोस्टर आईटीओ, पटेल चौक मेट्रो स्टेशन और अशोक रोड पर लगाए गए हैं. इनमें से एक पर लिखा है, ‘IIT कानपुर की रिपोर्ट कहती है कि पटाखों से कहीं अधिक प्रदूषण अन्य स्रोतों से होता है. आप केवल पटाखे ही देख पाए.’ दिल्ली पुलिस ने इन पोस्टरों को हटा लिया है.
 
एक पोस्टर पर लिखा है, ‘याकूब मेमन के लिए सुप्रीम कोर्ट रात को 2 बजे सुनवाई करता है. छोटे बच्चों को फुलझड़ी जलाने देने के लिए कब सुनवाई होगी.’ पोस्टरों में कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए लिखा है, ‘कोर्ट में करोड़ों मुकदमे बकाया हैं. जज साहब को दही हांडी, जल्लीकट्टू, दीपावली, हर त्योहार के लिए समय मिल जाता है.’ बता दें कि यह पोस्टर दिल्ली में ऐसी जगहों पर लगाए गए हैं, जहां पर दिल्ली पुलिस हमेशा मुस्तैद रहती है. आईटीओ इलाके में तो दिल्ली पुलिस का मुख्यालय भी है. दिल्ली पुलिस की नाक के नीचे सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते इन पोस्टरों को कौन लगा गया, इससे दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
 
गौरतलब है कि 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने 1 नवंबर तक के लिए पटाखों की बिक्री पर बैन लगाया है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण के एहतियातन पटाखों पर बैन लगाया है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का जहां अधिकतर लोगों ने स्वागत किया, वहीं कुछ लोगों ने इसे हिंदू विरोधी भी करार दिया है. लेखक चेतन भगत और त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत रॉय भी इस फैसले को हिंदू विरोधी करार दे चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट बैन हटाने से इनकार कर चुका है. पटाखा कारोबारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि प्रदूषण से जुड़े इस मसले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई. ‘सोशल मीडिया द्वारा एंटी हिंदू फैसला करार दिए जाने जैसी टिप्पणियों से दुख हुआ है.’