श्रीनगर. 9 अगस्त को जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए भारतीय सेना के जवान बशीर अहमद शहीद हुए. उनके साथ सेना की ट्रैक्रर डॉग यूनिट की सदस्य मानसी भी आतंकवादियों की गोली का शिकार बनी. आतंकियों को सबसे पहले मानसी ने ही देखा था. और आतंकियों की गोली का पहला शिकार मानसी ही बनी थी. 

जम्मू: आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए बशीर अहमद

‘मानसी’ के सेना में शामिल होने के बाद से ही बशीर अहमद हैंडल कर रहे थे. दोनों में आत्मीय रिश्ता बना चुका था. मानसी को आतंकियों की गोली लगने के बाद बदला लेने के लिए बशीर ने अतिरिक्त जवानों को मदद के लिए बुलाने के साथ ही आतंकियों पर अंधाधुंध फायरिंग की थी. सेना ने भी मानसी के अदम्य साहस की भी सराहना की.

सेना के मुताबिक इस साल मानसी और बशीर को तीन आतंकियों को मार गिराने में सफलता मिल चुकी थी. दोनों 25 मई को तंगधार के कैसुरी रिज इलाके में एक आतंकी और 21 जुलाई को दो आतंकियों को मार गिराने के अभियान में शामिल थे.