नई दिल्ली. भारतीय रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले करीब दो साल (सितंबर 2013 के बाद) के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. रुपया डॉलर के मुकाबले बुधवार को 36 पैसे की गिरावट के साथ 64.55 के स्तर पर खुला. वहीं मंगलवार के कारोबारी सत्र में भी रुपया डॉलर के मुकाबले 64.19 के स्तर पर बंद हुआ था.

चीन के चलते घटी रुपए की कीमत
आपको नाता दें कि चीन द्वारा उसकी करेंसी युआन की वैल्यू घटाने का असर रुपए पर भी पड़ा है. गौरतलब है कि डॉलर के मुकाबले रुपया 28 अगस्त 2013 को 68.80 के स्तर पर आ गया था. जानकार मानते हैं कि ताजा गिरावट की वजह से महंगाई बढ़ सकती है.

महंगाई बढ़ना तय  
भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट्स इम्पोर्ट करता है. रुपए में गिरावट से यह इम्पोर्ट बेहद महंगा हो जाएगा. इसकी वजह से तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में इजाफा कर सकती हैं. डीजल के दाम बढ़ने से माल की ढुलाई बढ़ जाएगी, जिसके चलते महंगाई में तेजी आ सकती है. भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी इम्पोर्ट करता है. रुपए के कमजोर होने से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं. 

एजेंसी इनपुट भी