गोरखपुर: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का गृह जिला जहां से जीतकर वो सूबे के मुख्यमंत्री बने, वहां पिछले कुछ दिनों में दिमागी बुखार की वजह से 60 बच्चों की मौत हो चुकी है. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले साल सितंबर से लेकर अबतक 224 बच्चों की मौत हो चुकी है. 
 
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल जनवरी से लेकर सितंबर के पहले हफ्ते तक 920 मरीज बीआरडी अस्पताल में दिमागी बुखार की शिकायत लेकर भर्ती हो चुके हैं. लेकिन ये आकंडा सिर्फ एक साल का नहीं है. गोरखपुर के साथ ये त्रासदी 1978 से जुड़ी हुई है. इस साल अबतक दिमागी बुखार से अबतक 144 लोगों की मौत हो चुकी है.
 
 
गोरखपुर में क्यों है दिमागी बुखार का प्रकोप?
 
गोरखपुर पिछले चार दशकों से जैपनीज इंसेफेलाइटिस यानी (JE) और acute encephalitis syndrome (AES) की चपेट में है. ये दोनों वायरल इंफेक्शन हैं जो सीधे दिमाग पर असर करते हैं जिससे पीड़ित कोमा में चला जाता है जिससे उसकी मौत हो जाती है. अगर कोई पीड़ित बच भी जाता है तो उसे जीवन भर मधुमेह, दिमागी और शारीरिक अक्षमताओं से जूझना पड़ता है. 
 
 
रिकॉर्ड बताते हैं कि दिमागी बुखार की वजह से पूर्वी उत्तर प्रदेश के इस जिले में हर साल सैंकड़ों लोग मारे जाते हैं. सरकारी डाटा के मुताबिक 1978 से लेकर अबतक गोरखपुर में इस बीमारी की वजह से 25 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. ये वो रिकॉर्ड है जो सरकारी फाइलों में दर्ज है. बिना रिकॉर्ड अगर बात की जाए तो ये आंकड़ा पचास हजार को भी पार कर जाता है क्योंकि कई बच्चों की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो जाती है.
 
 
गौरतलब है कि योगी सरकार ने इस साल बड़े स्तर पर दिमागी बुखार के लिए वैक्सिनेशन कार्यक्रम लॉन्च किया है लेकिन शायद उसका परिणाम आने में थोड़ा समय लगेगा. 
 
आखिर गोरखपुर में ही क्यों फैला है दिमागी बुखार?
 
1978 में पहली बार उत्तर प्रदेश में दिमागी बुखार का वायरस फैला, लेकिन साल 2005 में पहली बार यूपी तब सुर्खियों में आया जब पूरे राज्य में 5737 बच्चों में से 1344 बच्चों की मौत दिमागी बुखार की वजह से हो गई.
 
साल 2007 में बड़े स्तर पर यूपी में वैक्सीनेशन प्रोग्राम चलाया गया जिसे चीन से मंगाया गया था. इस मुहीम से राज्य के कई जिलों में लोगों को दिमागी बुखार से राहत मिली, लेकिन किसी वजह से गोरखपुर को इसका फायदा नहीं पहुंच सका.