लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर में शनिवार की शाम भीषण आग लग गई. आग लगने की वजह से पूरे अस्पताल में अफरातफरी मच गई थी. 
 
रिपोर्ट्स के मुताबिक एक वार्ड से दूसरे वार्ड में शिफ्ट होने की वजह से इलाज के अभाव पांच मरीजों की भी मौत हो गई है. हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि ये मौतें हादसे से पहले हुई थीं.
 
वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ ने तुरंत ही घटना की जांच के आदेश दे दिए थे. इसके अलावा रविवार की सुबह सीएम खुद पीड़ितों से मिलने के लिए अस्पताल भी पहुंचे थे.
 
आग सेकेंड फ्लोर पर ट्रॉमा सेंटर में लगी और धीरे-धीरे तीसरी मंजिल को भी अपनी चपेट में ले लिया. आनन-फानन में किसी मरीज़ को शताब्दी हॉस्पिटल तो किसी को दूसरे वॉर्ड में शिफ्ट किया गया, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई जिसमें एक नवजात भी शामिल है.
 
आग लगते ही पूरे अस्पताल में अफरातफरी मच गई, कोई अपने मरीज को गोद में लेकर भागा तो कोई कंधे पर उठाकर बाहर आया. कई लोगों का आरोप है कि चौथी मंजिल में बने NICU का नर्सिंग स्टाफ वहां भर्ती नवजातों को अंदर ही छोड़ कर बाहर भाग गया.
 
खास बात है कि हादसे के वक्त अस्पताल की सभी फायर फाइटिंग मशीनें खराब थीं, आग लगने के बाद फायर अलार्म भी नहीं बजा. सीएम योगी ने कमिश्नर से तीन दिन में हादसे की पूरी रिपोर्ट मांगी है.
 
लखनऊ के KGMU अस्पताल में लगी आग से कुछ सवाल उठ रहे हैं-
 
फायर फाइटिंग मशीन सही हालत में क्यों नहीं थीं ?
फायर फाइटिंग मशीन को देखने की जिम्मेदारी किसकी थी ?
इस बड़ी लापरवाही का जिम्मेदार कौन है ?
फायर अलार्म क्यों नहीं बजा ?
मरीजों को बाहर निकालने का वैकल्पिक इंतजाम क्यों नहीं था ?