नई दिल्ली: देश की सबसे सम्मानित नौकरी ‘आईएएस’ बनना किसी के लिए सपने से कम नहीं है. हर साल कई आइएस अफसर आते हैं चले जातें हैं लेकिन कई ऐसे होते हैं जो लोग के दिल और दिमाग पर ऐसे छा जाते हैं जिन्हें भूलाना किसी के लिए भी नामुमकिन है.
 
जी हां आज हम ऐसे ही जाबांज अफसर रुद्रप्रयाग के डीएम मंगेश घिल्डियाल की बात कर रहे हैं. जिन्होंने कुछ ऐसा किया है जिनकी कितनी भी तारीफ करें कम है. मंगेश ने कई ऐसे काम किए है जिसकी जितनी भी तारीफ करो कम है लेकिन आज हम उस घटना की बात करेंगे जिसने मंगेश स्पेशल बना दिया है.
 
 
मंगेश कुछ दिनों पहले एक रूटीन चेक के लिए रुद्रप्रयाग के राजकीय गर्ल्स इंटर कॉलेज गए थे. वहां जाने पर उन्हें पता चला कि स्कूल में साइंस का कोई टीचर ही नहीं है. उन्होंने तुरंत इसका समाधान निकाला और अपनी पत्नी ऊषा घिल्डियाल से स्कूल में किसी शिक्षक की तैनाती होने तक पढ़ाने को कहा, पत्नी भी मान गईं और स्कूल की छात्राओं को उनकी साइंस की टीचर मिल गई.
 
मंगेश की पत्नी ऊषा घिल्डियाल ने खुद पंतनगर यूनिवर्सिटी से प्लांट पैथलॉजी में पीएचडी किया है.इस बारे में मंगेश से बात करने पर उन्होंने बताया, ‘मैं रूटीन चेक पर जीजीआईसी गया हुआ था, वहां जाने पर पता चला कि छात्राओं को पढ़ाने के लिए कॉलेज में साइंस के टीचर नहीं हैं. मैंने पत्नी से बात की और चूंकि इन दिनों वह घर पर ही हैं, तो वह भी तैयार हो गईं.
 
कॉलेज के प्रिंसिपल से जब इस बारे में बात की, तो उन्हें भी कोई आपत्ति नहीं थी और उन्होंने इस फैसले का स्वागत किया.’ बिना किसी स्वार्थ और पैसे के निशुल्क रूप से उषा घिल्डियाल कक्षा 9 और 10वीं की छात्राओं को विज्ञान पढ़ा रही हैं. वह प्रतिदिन दो से ढाई घंटे स्कूल में बच्चों की पढ़ाई को दे रही हैं.
 
सुबह साढ़े 8 बजे स्कूल पहुंच रही हैं, जबकि साढ़े 11 साढ़े बजे तक स्कूल में ही रहती हैं. उषा घिल्डियाल पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में साइंटिस्ट रह चुकी हैं.  2011 बैच के IAS अफसर मंगेश ने UPSC की परीक्षा में पूरे देश में चौथी रैंक हासिल की थी. मंगेश ने हमेशा ही अपनी एक अलग छाप छोड़ी है. मई में जब उनका बागेश्वर जिले से ट्रांसफर हो रहा था, तो वहां के लोग विरोध में सड़कों पर उतर आए। जगह-जगह भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे.