नई दिल्ली/लखनऊ. यूपी में नए लोकायुक्त की नियुक्ति के मामले में यूपी के चीफ सेक्रेटरी आलोक रंजन की ओर से दाखिल हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है. सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामे पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह हलफनामा संतुष्टिदायक नहीं है. नए लोकायुक्त की नियुक्ति के मामले में चीफ सेक्रेटरी की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया था कि सरकार का इस मामले में गंभीर प्रयास चल रहा है और नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है.

याचिकाकर्ता ने कहा कि पिछले साल अप्रैल महीने में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पारित किया था कि छह महीने के भीतर लोकायुक्त की नियुक्ति की जाए, लेकिन सरकार ने अभी तक इस पर कार्रवाई नहीं की. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पिछले साल आदेश पारित किया गया था और अब जुलाई आ चुका है. कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अभी तक सरकार यह कह रही है कि नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है और अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि नियुक्ति कब कैसे और किस स्थिति में है.

बुधवार तक नया हलफनामा पेश करे यूपी सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी से कहा है कि वह बताए कि लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर अभी तक क्या स्टेप लिए गए हैं और वर्तमान में क्या स्थिति है. अदालत ने यह भी साफ करने को कहा है कि आगे क्या कदम उठाए जाएंगे यह भी बताया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी से बुधवार तक नया हलफनामा पेश करने को कहा है अगली सुनवाई के लिए अदालत ने गुरुवार की तारीख तय की है. 

गौरतलब है कि नए लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर दाखिल याचिका पर यूपी के चीफ सेक्रेटरी की ओर से जुलाई के पहले हफ्ते में जवाब दाखिल किया गया था और कहा गया था कि नए लोकायुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है. चीफ सेक्रेटरी ने बताया कि मौजूदा उप लोकायुक्त का कार्यकाल सितंबर तक है. इसी साल मार्च में यूपी में लोकायुक्त की नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी किया था और जवाब मांगा था. 

क्या है पूरा मामला

यूपी में लोकायुक्त की नियुक्ति में देरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था. अर्जी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल यूपी  सरकार से कहा था कि वो 6 माह में लोकायुक्त की नियुक्ति करे. सरकार को 24 अक्टूबर तक नियुक्ति करनी थी पर उसने नहीं किया ऐसे में यूपी सरकार के खिलाफ अदालत की अवमानना का केस चलना चाहिए. इस मामले में यूपी के चीफ सेक्रेटरी को प्रतिवादी बनाया गया था. इस मामले में यूपी के चीफ सेक्रेटरी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया गया था.