पुणे: नदियां किसी भी देश का जीवन, या यूं कहें कि शरीर में बहने वाली नसें होती हैं. नदियों के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. मगर अफसोस कि अब नदियां विलुप्त होती जा रही हैं. नदियों पर बन रहे प्लांट और परियोजनाएं इसके अस्तित्व को लगातार खतरे में डाल रही हैं. शायद यही वजह है कि पुणे की इंद्रायणी नदी भी सुखती जा रही है.

बिसलरी, आज प्यास बुझाने के लिए देश में पहली चॉइस बन गई है, मगर दुख की बात यह है कि बिसलरी की मेन्यूफैक्चरिंग कंपनी इंद्रायणी नदी को सुखाती जा रही है. इसके आस-पास खेती नहीं हो पा रही है.  यही वजह है कि अब पाथरगांव गांव के 800 किसानों ने कंपनी के खिलाफ आवाज उठाते हुए न्याय की गुहार लगाई है.
 
दरअसल, साल 2011 में बिसलरी इंरनैशनल प्राइवेट लिमिटेड ने कामशेट नदी के पास प्लांट लगाया था. यह मुंबई-पुणे हाइवे पर इंद्रायणी ब्रिज के पास स्थित है. पाथरगांव गांव कंपनी के प्लांट से महज 400 मीटर की दूरी पर है. मगर हालत ये है कि वहां अब खेती पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है. क्योंकि यहां की खेती इसी नदी पर निर्भर होती थी. साथ ही गांव जीविका पूरी तरह से खेती पर निर्भर है.
 
बताया जा रहा है कि गांव के पूर्व सरपंच बाबूराव केदारी ने तहसील, जिलाधिकारी और पुणे मेट्रोपॉलिटन रीजनल डिवेलपमेंट अथॉरिटी (PMRDA) के सामने न्याय की गुहार लगाई है. वे कंपनी द्वारा गांव के नजदीक बांध बनाकर इंद्रायणी नदी से गैरकानूनी तरीके से पानी लेने के खिलाफ कार्यवाई की मांग कर रहे हैं. 
 
कादरी के मुताबिक, यह गांव मावल बेल्ट में पड़ता है और ये बेल्ट पुणे जिले की ऐसी बेल्ट है, जहां अच्छी खेती होती है. पहले यहां कभी पानी की किल्लत नहीं हुई. मगर साल 2011 में बिसलरी का प्लांट लगाए जाने के बाद से गांव वालों को पानी से जुड़ी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं. अपनी फसल को बचाए रखने के लिए सिंचाई के लिए किसानों को 400 रुपये प्रति घंटा की दर से पानी खरीदना पड़ रहा है.
 
आगे कादरी ने कहा कि ‘मैं कंपनी के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने जा रहा हूं, क्योंकि कंपनी ने गैरकानूनी ढंग से प्लांट लगाया है, उसके पास कानूनी दस्तावेज नहीं हैं. इतना ही नहीं, कंपनी गैरकानूनी तरीके से वह पानी भी ले रही है, जो हमारी फसलों के लिए है और उसे बाहर बेच रही है. 
 
आपको बता दें कि कंपनी ने गांव से थोड़ी दूरी पर पत्थरों और मिट्टी से कच्चा बांध बनाया है, जिसके कारण पानी की धारा रूक गई है और इसी कारण अब ये नदी धीरे-धीरे सुखने लगी है.