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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने त्रिवेंद्र रावत, कैसे रहा संघ प्रचारक से लेकर सीएम की कुर्सी तक का सफर

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने त्रिवेंद्र रावत, कैसे रहा संघ प्रचारक से लेकर सीएम की कुर्सी तक का सफर

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  • Updated
  • :
  • Friday, March 17, 2017 - 17:48
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने त्रिवेंद्र रावत, कैसे रहा संघ प्रचारक से लेकर सीएम की कुर्सी तक का सफरjourney of trivendra singh rawat from sangh pracharak to uttarakhand cmFriday, March 17, 2017 - 17:48+05:30
नई दिल्ली : उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री के तौर पर त्रिवेंद्र सिंह रावत को चुन लिया गया है. शुक्रवार को उनका नाम बीजेपी की संसदीय दल की बैठक में सीएम के तौर पर चुना गया. बता दें कि उत्तराखंड में सीएम पद के कई दावेदार थे, जिनमें रावत के साथ पूर्व मंत्री प्रकाश पंत का नाम सबसे आगे चल रहा था. 
 
त्रिवेंद्र रावत न सिर्फ उत्तराखंड में पूर्व कृषि मंत्री रह चुके हैं बल्कि वो आरएसएस से जुड़े रहे हैं. उनके संघ प्रचारक से लेकर कई दावेदारों के बीच सीएम पद पाने तक का सफर हम यहां बता रहे हैं. 
 
अमित शाह के करीबी
56 वर्षीय त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विधानसभा चुनाव 2017 में बीजेपी को डोईवाला सीट से जीत दिलवाई थी. उन्हें बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह का करीबी माना जाता है. फिलहाल रावत  झारखंड के प्रदेश प्रभारी का पद भी संभाल रहे हैं. 
 
20 दिसंबर 1960 को पौड़ी गढ़वाल के खैरासैंण (जहरीखाल) में फौजी परिवार में जन्में त्रिवेंद्र रावत ने पत्रकारिता से पीजी की पढ़ाई की. वह 19 साल की उम्र में ही संघ से जुड़ गए थे. वह दो साल तक स्वयं सेवक संघ की शाखाओं में जाते रहे और फिर संघ की नीतियों से प्रभावित होकर साल 1981 में उन्होंने प्रचारक का काम करने का फैसला ले​ लिया. 
 
 
इसके बाद रावत ने वर्ष 1983 से 2002 तक आरएसएस के प्रचारक के तौर पर काम किया. वह पहली बार 2002 में डोईवाला सीट से विधायक बने थे. तब से रावत डोईवाल सीट पर तीन बार जीत चुके हैं. त्रिवेंद्र 2007-12 तक राज्‍य के कृषि मंत्री भी रहे हैं. हालांकि, उनका नाम बीज घोटलने में आ चुका है लेकिन उन पर कोई आरोप साबित नहीं हुआ था. 
 
मिलीं क्या-क्या जिम्मेदारियां
त्रिवेंद्र रावत को वर्ष 1985 में देहरादून महानगर का प्रचारक नियुक्त किया गया. साल 1993 में संघ की ओर से उन्हें बीजेपी में संगठन मंत्री का दायित्व दिया गया. राज्य आंदोलन में भी त्रिवेंद्र की अहम भूमिका रही. वह कई बार गिरफ्तार हुए और जेल भी गए. 
 
साल 1997 से 2002 तक बीजेपी में उन्हें प्रदेश संगठन का मंत्री बनाया गया. इस दौरान बीजेपी ने विधानसभा, लोकसभा और विधान परिषद चुनाव में बड़ी सफलता हासिल की. साल 2002 में पहले विधानसभा चुनाव में डोईवाला से चुनाव जीता और विधायक बने. साल 2007 में डोईवाला से दोबार जीतकर बीजेपी सरकार में कृषि मंत्री बने.
 
 
बता दें कि 18 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य के नए मुख्यमंत्री और विधायकों को शपथ दिलवाएंगे. शहर के परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां की जा रही हैं. 
First Published | Friday, March 17, 2017 - 17:48
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