बनासकांठा: रंगों का त्यौहार होली देशभर में बड़े धूमधाम से मनया जाता है. लेकिन देश में एक ऐसी भी जगह है जहां होली मनाना मना है.
 
असत्य पर सत्य की जीत का त्यौहार होली देश के हर राज्य, प्रांत, कस्बे में मनाया जाता है. लेकिन गुजरात के बनासकांठा जिले के डीसा तहसील में एक ऐसा भी गांव है जहां पिछ्ले 200 सालों होली नहीं मनाई गई है. होली के नाम से ही यहां के लोग में डर का माहौल बन जाता है. इस गांव का नाम है ‘रामसन’.
 
 
लगी आग
गांव को पोरानिक नाम ‘रामेश्वर’ है. यहां ऐसा बताया जाता है कि भगवान राम ने यहां आकर रामेश्वर भगवान की पूजा भी की थी. 10 हजार की आबादी वाले इस गांव में 207 साल पहले होली मनाई गई थी. लेकिन अचानक ही गांव में आग लग गई थी. लोग में इसी समय से डर पैदा हो गया.
 
साधुओं का श्राप
आग क्यों लगी इसके पीछे की मान्यता में बताया जाता है कि उस समय के राजा ने साधू-संतो को अपमानित किया था और साधुओं ने श्राप दिया था. जिससे होली के त्योंहार पर आग लगी थी. इसके कुछ सालों बाद फिर से गांव के लोगों ने होली जलाने की कोशिश की लेकिन आग फिर लग गई. इससे कुछ मकान भी जले.
 
 
होली जलाना मना
ऐसा यहां 3 बार हुआ और होली के हर दिन आग लग जाती. जिसके बाद यहां ‘होली’ नहीं जलाई जाती. गांव के लोगों के मुताबिक जब होली आती है तब गांव के बुजुर्ग लोगों से सुनी तबाही की बात याद आ जाती है. जिसके बाद होली के बारे में कोई सोचता भी नहीं है. 200 साल पहले होली जलाई गई थी और भयानक आग लग गई थी तब से यहां होली जलाना मना है. 
 
बता दें कि रामसन गांव के लोग आज भी डरे हुए हैं और भयभीत है. जिसके कारण कोई भी होली मनाना नहीं चाहता. लोग आज भी शापित भूमि से डरे-सहमे हैं कि अगर होली जलाई गई तो फिर से गांव आग की लपटों में घिर जाएगा.