नई दिल्‍ली. विश्व प्रसिद्ध कैलाश-मानसरोवर यात्रा 8 जून से शुरू हो गई है. यह पावन यात्रा अपने धार्मिक महत्व के लिए दुनियाभर में जानी जाती है. इस यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों कई अद्वितीय अनुभव मिलते हैं, वहीं मीलों दुर्गम पैदल सफर भी तय करना पड़ता है. उत्तराखंड से होकर जाने वाले परंपरागत मार्ग के साथ ही इस बार सिक्किम के नाथूला दर्रे से भी यात्रा शुरू की गई है. यह यात्रा करीब सवा दो महीने तक चलेगी. 

इस यात्रा से जुड़ी विभिन्‍न अहम बातें नीचे दी गई है:-

-इस साल कैलाश मानसरोवर यात्रा 08 जून से 09 सितंबर तक चलेंगी.
-यात्रा में दो रुटों का कर सकते हैं इस्‍तेमाल- उत्‍तराखंड में लिपुलेख दर्रा और सिक्किम नाथूला दर्रा होकर.
-यात्रा से पहले सारी तैयारियों को लेकर यात्रियों को 3-4 दिन दिल्‍ली में ठहरने की जरूरत होगी.
-दिल्‍ली सरकार की ओर से यात्रियों के दिल्‍ली में रुकने के दौरान निशुल्‍क भोजन और ठहराव की व्‍यवस्‍था. हालांकि, यात्री अपने स्‍तर पर भी ठहरने का प्रबंध करने के लिए स्‍वतंत्र हैं.
-यात्रा के दौरान यात्रियों को 19,500 फीट की ऊंचाई वाले जगहों पर भी चलने (ट्रैकिंग) की जरूरत होगी. इस दौरान काफी ठंड और प्रतिकूल मौसम का भी सामना करना पड़ सकता है. जो श्रद्धालु शारीरिक और चिकित्‍सीय तौर पर पूरी तरह फिट नहीं हैं, उनके लिए सेहत के मद्देनजर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
 

यात्रा के दौरान पड़ने वाले रूट:
-रूट 1: लिपुलेख दर्रा (उत्‍तराखंड), 60-60 यात्रियों के कुल 18 जत्थे कैलाश मौजूदा मार्ग से मानसरोवर की यात्रा पर जाएंगे. हर जत्‍थे के लिए 25 दिनों की समय अवधि होगी. प्रति व्‍यक्ति अनुमानित खर्च करीब 1.5 लाख रुपये.
-रूट 2: नाथूला दर्रा (सिक्किम) : 50-50 श्रद्धालुओं के पांच जत्थे नाथूला दर्रे के रास्ते जाएंगे. हर जत्‍थे में 50 श्रद्धालु होंगे. हर जत्‍थे के लिए 23 दिनों की समय अवधि तय. प्रति व्‍यक्ति अनुमानित खर्च करीब 1.7 लाख रुपये.
-कैलाश मानसरोवर तीर्थ स्थल चीन के तिब्बत स्वायत प्रांत में स्थित है.
 -तीर्थ यात्रा पर जाने वालों के हित सुनिश्चित करने के लिए ट्रैकिंग प्रणाली सहित अन्य विस्तृत व्यवस्थाएं. पहला जत्था उत्तराखंड के लिपूलेख दर्रे वाले मौजूदा मार्ग से रवाना.
-ट्रैकिंग प्रणाली लगाई गई ताकि तीर्थ यात्रियों के कल्याण और उनके स्थान का पता रहे.