नई दिल्ली. दशहरे के शुभ अवसर पर दुर्गा की पूजा के साथ शस्त्रों की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन जो लोग हथियार रखते हैं वो मां चंद्रिका को याद करते हुए अपने-अपने हथियारों की पूजा करते हैं. 
 
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दशहरे के पवित्र त्योहार में हथियारों की पूजा का विशेष महत्व है. शस्त्र पूजन की परंपरा बहुत पुरानी है, जिसे हर साल बड़े ही धूमधाम के साथ किया जाता है. शस्त्र हमारी रक्षा करते हैं. शस्त्रों की पूजा से विजय प्राप्ति होती है. इसी दिन लोग नया कार्य प्रारंभ करते हैं.
 
शस्त्रों की पूजा करने की यह  वजह है कि इस दिन राजा विक्रमादित्य ने देवी हरसिद्धि की आराधना की थी. छत्रपति शिवाजी ने भी इसी दिन मां दुर्गा को प्रसन्न करके भवानी तलवार प्राप्त की थी.  
 
इस दिन पूजा-अर्चना के साथ इस बात का भी खास खयाल रखें कि कोई लापरवाही न हो. क्योंकि आपकी जरा-सी लापरवाही अनहोनी को न्योता दे सकती है. हथियारों की सफाई करते समय सावधानी  ये सावधानी बरतें. 
 
  • दशहरा पर्व के अवसर पर अपने शस्त्र को पूजने से पहले सावधानी बरतना न भूलें. हथियार के प्रति जरा-सी लापरवाही आपके लिए जिंदगी भर की परेशानी का कारण बन सकती है. 
  • खासतौर पर हथियारों पर बच्चों की नजर न पड़ने दें. हथियारों को अपने बच्चों से दूर रखें. ताकि वो गलती से भी उन हथियारों तक ना पहुंच सकें. 
  • घर में इन हथियारों की पूजा करते वक्त बच्चों पर खास ध्यान दें. उनको देंखते रहें कि किसी भी तरह बच्चों को हथियार छूने ने दें. हो सके तो उन्हें दिखाए नहीं. उनकी नजर से दूर रखें.
  • हथियार बहुत खतरनाक होते हैं इसलिए साफ-सफाई में ध्यान देने की जरूरत है. बंदूक और पिस्टल को लेकर ज्यादा सतर्क रहें. 
  • ये आपको भी पता है हथियार कोई खेलने की चीज नहीं है. तो इसे खिलौना समझने की भूल न करें. क्योंकि ऐसी कई लापरवाही की घटनाएं सामने आ चुकी हैं.