नई दिल्ली. शनिवार से मां दूर्गा को समर्पित नवरात्रि शुरू हो गई है. नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-आराधना का विधान है. मां शैलपुत्री गिरिराज हिमालय की पुत्री पार्वती की ही स्वरूप हैं. मां पार्वती के इस स्वरूप को अखंडसौभाग्यदायिनी माना गया है.
 
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सबसे पहले आपको बता दें कि इस बार नवरात्रि की शुरूआत शनिवार से हो रही है, इसलिए मां दूर्गा घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं. इसे युद्ध का प्रतीक माना गया है. हालांकि 10 दिन की नवरात्रि होने के कारण यह संयोग शुभ साबित होगा.
 
मां शैलपुत्री का स्वरूप
मां शैलपुत्री के दाहिने हाथ में भगवान शिव का त्रिशूल और बाएं हाथ में भगवान विष्णु का दिया हुआ कमल का फूल सुशोभित है. मां शैलपुत्री बैल की सवारी करती हैं. देवी पार्वती के इस स्वरूप को जीव-जंतुओं का रक्षका माना गया है. ज्योतिष के अनुसार मां शैलपुत्री को चंद्रमा का स्वरूप माना गया है. मां की पूजा से चंद्रमा के बुरे प्रभाव से बचा जा सकता है.
 
पूजा विधि
सबसे पहले स्नान करके पूजा स्थल पर पूजन सामग्री के साथ बैठें. फिर विधिवत करें. उसके बाद मां शैलपुत्री की तस्वीर या प्रतिमा पूजा स्थल पर बीच में स्थापित करें. उसके बाद फल-फूल और नैवेद्य से मां की विधिवत पूजा करें. फिर अंत में आरती करें. 
 
 
ध्यान मंत्र
वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रार्धकृत शेखराम्।
वृषारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्वनीम्॥
 
स्तोत्र पाठ
प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्।
धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्॥
त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्।
सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥
चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन।
मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रमनाम्यहम्॥
 
आप सभी को की ओर से नवरात्रि की ढेरों शुभकामनाएं. आपका दिन मंगलमय हो!