नई दिल्ली. जस्टिस मार्कंडेय काटजू और विवादों का चोली दामन का साथ है. अपने बयानों को लेकर जस्टिस काटजू हमेशा सुर्खियों में रहते हैं. जस्टिस काटजू लगभग हर मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखते हैं और विवादों को जन्म देते हैं. 
 
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चाहे मीडिया और सरकार के बीच चर्चा छेड़ने की बात हो या फिर सलमान रुश्दी को लेकर अपनी राय रखनी हो. सनी लियोनी का मुद्दा हो या फिर कोर्ट में जजों की संख्या को लेकर विवाद हो, काटजू हर मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखते हैं. 
 
सोशल मीडिया का करते हैं भरपूर इस्तेमाल
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश और प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया (पीसीआई) के चेयरमैन रहे चुके जस्टिस मार्कंडेय काटजू अपनी बात कहने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भरपूर उपयोग करते हैं. इस बार मार्कंडेय काटजू ने फेसबुक पर 2002 में हुए गोधरा दंगों के संबंध में एक पोस्ट डाला है. इस पोस्ट में काटजू ने दंगों को लेकर अपनी व्यक्तिगत राय जाहिर की है.

काटजू ने लिखा है, ‘गुजरात के गोधरा में 2002 में हुए साम्प्रदायिक दंगों में 2000 से अधिक मुसलमानों की मौत हुई थी. इसमें कांग्रेस के एक पूर्व मुस्लिम सांसद एहसान जाफरी भी शामिल थे. कुछ लोगों ने इस घटना को साबरमती एक्सप्रेस में हिंदू समुदाय के 54 लोगों को आग लगाकर मौत के घाट उतार दिए जाने के बाद की प्रतिक्रिया बताया.’

हिटलर से की तुलना
काटजू आगे लिखते हैं, ‘क्रिया की प्रतिक्रिया वाले सिद्धांत को मैं सही नहीं मानता. नाजियों ने भी यहूदियों के विरुद्ध 10 नवंबर 1938 में किए गए अत्याचार को एक जर्मन राजनयिक की हुई हत्या के बाद पनपे जनआक्रोश का नतीजा बताया था. जबकि ये सभी को पता है कि यह हमला गोएरिंग, हिमलर और हेड्रिक द्वारा पहले से सुनियोजित षड़यंत्र था.’ 
 
उन्होंने आगे लिखा, ‘मेरा अपना व्यक्तिगत मत है कि गोधरा दंगे कुछ दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों की सुनियोजित चाल थी. इन हिंदू संगठनों ने साबरमती एक्सप्रेस में अपने ही समुदाय के कुछ लोगों की हत्या की साजिश रची, जिससे की मुस्लिमों पर आरोप मढ़ा जा सके. गोधरा की घटना मुझे ग्लिविट्ज घटना की याद दिलाती है.’ 
 
पहले भी रह चुके हैं विवादों में
जस्टिस काटजू ने हाल ही में महात्मा गांधी को ब्रिटिश एजेंट और सुभाष चंद्र बोस को जापानी एजेंट बताकर हंगामा मचा दिया था. इस बयान को लेकर संसद में भी भरपूर हंगामा हुआ था. यही नहीं काटजू ने बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन को भी ‘खाली दिमाग आदमी’ बताया है. इसके पहले काटजू ने अपने एक बयान में 90 प्रतिशत भारतीयों को बताकर खासा विवाद को जन्म दिया था.