मुंबई. मैगी नूडल्स की गुणवत्ता को लेकर देशभर में कई सवाल उठ रहे हैं. कई राज्यों से नेस्ले के इस बहुचर्चित ब्रांड के सैंपल इकठ्ठा किए गए हैं. यूपी से लिए गए नमूनों में मैगी में तय मात्रा से 17 गुना ज्यादा लेड यानी सीसा पाया गया. पैकेट में जिक्र न होने के बावजूद भी मैगी के मसाले में मोनो सोडियम ग्लूटामेट पाए जाने का आरोप है. आइए जानते हैं कि आखिर तय सीमा से ज्यादा खाने पर सीसा और एमएसजी हमारे लिए कितने ख़तरनाक हैं.

क्या कहते हैं जानकार
जानकार कहते हैं कि खून में सीसे की अधिक मात्रा में जमा होने से कैंसर, दिमागी बीमारी, मिर्गी या फिर किडनी ख़राब हो सकती है. कुछ मामलों में इससे मौत भी हो सकती है. लेड बच्चों के दिमागी विकास पर स्थायी असर डाल सकता है. इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी मुंबई में फूड केमिस्ट्री विभाग के असोसिएट प्रोफेसर डॉ उदय अन्नापुरे के मुताबिक “शरीर में कई मेटल होते हैं, जो खून के प्रवाह के ज़रिये शरीर के किसी भी हिस्से में जा सकते हैं. सीसे के ज्यादा मात्रा में इकठ्ठा होने से सिरदर्द, तनाव या फिर यादाश्त कमज़ोर हो सकती है.”

उनका कहना है कि कई पौधों में प्राकृतिक रूप से पाया जाना वाला ग्लूटामेट अमीनो एसिड है. मैगी पर लगे आरोप के मुताबिक इसे मसालामेकर में मिलाया गया, लेकिन जानकारी नहीं दी गई. मोनोसोडियम मिलने से ग्लूटामेट में नमक तेज हो जाता है, जिससे नर्वस सिस्टम पर असर हो सकता है, ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, शरीर के कई हिस्सों में सिहरन या जलन का अनुभव हो सकता है.

डॉ अन्नापुरे कहते हैं कि एमएसजी नर्वस सिस्टम पर असर डालता है, इसलिए बच्चों के खाने में इसे मिलाने पर ख़ासतौर से मनाही है. अगर आप एफएसएसआई की सूची देखेंगे, तो 100 से ज्यादा खानों में इसका इस्तेमाल वर्जित है.” एक अनुमान के मुताबिक सवा सौ करोड़ की आबादी वाले देश में खाने की गुणवत्ता जांचने के लिए लगभग 3,000 लोग हैं, ऐसे में जरूरी हो जाता है कि अपनी सेहत का ख्याल हम खुद रखें, दो मिनट के चक्कर में सेहत से खिलवाड़ ना करें.

IANS से भी इनपुट