नई दिल्ली. हम और आप सदियों से देखते आ रहे हैं कि लड़का लड़की को ब्याह कर अपने घर ले जाता है, लेकिन हमने और आपने कभी ये नहीं सोचा कि आखिर लड़की ही लड़का के घर क्यों जाती है. लड़का भी तो लड़की के घर जा सकता है?
 
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वैसे आपको पहले ही बता दें कि आज के बाद आपको पास इस सवाल का जवाब हो जाएगा, क्योंकि आज हम सदियों से चली आ रही परंपरा से परदा उठाने वाले हैं.
 
सबसे पहले आपको बताते चलें कि शादी के बाद लड़की का लड़के के घर जाना केवल हिन्दुओं में ही नहीं, बल्कि सभी जातियों में होता है और देश की बात कौंन करे विदेशों में भी ऐसा ही होता है.
 
दरअसल शादी के समय एक रस्म होती है जिसे ‘कन्यादान’ कहा जाता है. कन्यादान की रस्म के साथ पिता अपनी बेटी का हाथ दुल्हे के हाथ में देता है और अपनी जिम्मेदारियों से सदा के लिए मुक्त हो जाता है. कन्या का हाथ दुल्हे के हाथ में देते समय पिता दुल्हा से कहता है, ‘मैंने अब तक अपनी इस लक्ष्मी रूपी बेटी का लालन-पालन किया. उसे काबिल बनाया. अपना पिता धर्म निभाया और आज से यह तुम्हारी हो गई. आज से इसकी सारी जिम्मेदारी तुम्हारी हो गई.’
 
इसके पीछे मनु संहिता के मुताबिक मान्यता यह है कि स्त्री देवी का रूप होती है. वह सभी लोगों का कल्याण करने वाली होती है. शादी के बाद वह घर की देवी मानी जाती है. अब जब वह घर की देवी है तो कोई अपनी देवी को ससुराल में कैसे छोड़ सकता है. साथ-ही-साथ धर्म के मुताबिक यह पाप भी है.