गांधीनगर. गुजरात मे एक विज्ञापन से बवाल मच गया है और बवाल इतना बढ़ा की मामला पुलिस थाने तक पहुंच गया है. गुजरात के अहमदाबाद के एक कॉलेज मे सफाई कर्मी की जरूरत मे सवर्णो को प्राथमिकता देनें की बात से विवाद खड़ा हो गया है.
 
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विज्ञापन मे कहा गया कि सवर्ण मसलन, ब्राह्मण, क्षत्रिय, बनिया, पटेल, जैन, सैयद, पठान, सीरियन ईसाई एवं पारसी आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी.
 
ये विज्ञापन अहमदाबाद के सेंट जेवियर्स कॉलेज परिसर स्थित सेंट जेवियर्स नॉन फॉर्मल एजुकेशन सोसायटी के ह्यूमन डेवलपमेंट एंड रिसर्च सेंटर का है. मामला तब सामने आया, जब ब्राह्मण समाज के कुछ युवक विरोध जताने पहुंचे. हालाकि प्रबंधन इसेम कुछ भी गलत होन से इंकार करते हैं.
 
विरोध दर्ज करवाने पहुंचे लोगो की माने तो सवर्णों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले इस विज्ञापन को तुरंत नोटिस बोर्ड से हटाया जाए और प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए. इनके मुताबिक ये विज्ञापन समाज मे वर्ग विग्रह कराने वाला है.
 
मामले की पुलिस को शिकायत भी गई है जिसका पुलिस संज्ञान ले रही है. हालांकि अभी तक इस मामले मे कोई कार्रवाई नहीं की गई है. जानकारों के मुताबकि यह विज्ञापन हमारी मौजूदा सामाजिक व्यवस्था कितनी कड़वी एवं कठोर है, इसका एक आईना है. एक ओर सवर्ण ओबीसी में शामिल होने के लिए आंदोलन कर रहे हैं.
 
 
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उन्हें आर्थिक आरक्षण भी मिलता है लेकिन जो जाति सदियों से एक ही प्रकार के साफ-सफाई के गंदे काम में जन्मजात आरक्षण भोग रहे हैं. आरक्षण की मांग करने वाले सवर्ण इसके लिए क्यों तैयार नहीं.

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