नई दिल्ली. अगर आप सही है तो कोर्ट के आर्शीवाद की जरूरत नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी महाराष्ट्र के सांगली कॉपरेटिव बैंक सोसाइटी के चुनाव को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान की. सुभाष काकड़े और अन्नास हर्जे ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनोती दी है. 
 
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मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान सुभाष काकड़े और अन्नास हर्जे के वकील दुष्यंत परासर ने दलील दी की चुनाव कल यानि बुधवार को होना है ऐसे में बाद में ये पाया गया कि मेरी अयोग्यता गलत थी तो मेरे साथ नाइंसाफी होगी. इस लिए मुझे चुनाव लड़ने का एक मौका दिया जाना चाहिए.
 
जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव की प्रक्रिया एक बार शुरू होने के बाद उसे रोक नहीं जा सकता. कोर्ट ने कहा की आपने अपनी योग्यता को स्वीकार कर लिया है क्योंकि अभी तक आपने इंक्वायरी ऑफिसर के आदेश को चुनोती नहीं दी है. हालांकि कोर्ट ने इतनी राहत देते हुए कहा कि आप अगर चाहे तो रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते है और सुप्रीम कोर्ट का आदेश आपकी याचिका को प्रभावित नहीं करेगा.
 
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दरअसल जाँच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कॉपरेटिव सोसाइटी में सदस्य रहते हुए सुभाष काकड़े ने 11 लाख 78 हज़ार और अन्नास हर्जे ने 2 लाख 20 हज़ार का गबन किया है. इनके अलावा 24 और लोगों पर भी आरोप लगे थे. जिनमें से 10 लोगों ने जाँच अधिकारी के रिपोर्ट पर मिनिस्टर ऑफिस से रोक ले ली थी लेकिन सुभास काकड़े और अन्नास हर्जे ने इस पर रोक नहीं ली. मामला हाई कोर्ट पहुँचा और कोर्ट ने इनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाते हुए अयोग्य घोषित कर दिया था.