नई दिल्ली. गुजरात के गुलबर्ग नरसंहार मामले में स्पेशल कोर्ट के आदेश की कॉपी आ गई है. अपने आदेश में कोरेट ने मारे गए पूर्व सांसद एहसान जाफरी को ही इसका जिम्मेदार ठहराया. कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा कि 2002 में हुए गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसायटी पहुंची भीड़ का मकसद वहां मौजूद लोगों की हत्या करना नहीं था. लेकिन सांसद जाफरी के भीड़ पर फायरिंग करने के कारण ही ऐसा हुआ. शुक्रवार को आए कोर्ट के फैसले में इस मामले में 24 लोगों को दोषी पाया जिनमें से 11 को सजा-ए-मौत की सजा सुनाई गई है.
 
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गुलबर्ग सोसायटी मामले की सुनवाई कर रही रही स्पेशल कोर्ट के जज पीबी देसाई ने लिखा है कि गुलबर्ग सोसायटी पहुंची भीड़ मुख्यतः अल्पसंख्यक समुदाय पर पत्थरबाजी, आगजनी, वाहनों और संपत्तियों को क्षतिग्रस्त करने में लिप्त थी. घटना के बाद इसकी जांच करने पहुंची गुजरात पुलिस के सबूत और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने कहा कि जाफरी की फायरिंग से भीड़ के कुछ सदस्यों की मौत हो गई और कुछ घायल भी हुए. 
 
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फैसले में लिखा गया कि भीड़ के कुछ सदस्यों ने अल्पसंख्यकों के नेता जाफरी को फायरिंग करते हुए देख लिया जिसके बाद वो बेकाबू हो गए और जाफरी की हत्या कर दी. इस घटना में 69 लोगों की जान चली गई. इस घटना में एहसान जाफरी ने जनता को भड़काने का काम किया जिससे भीड़ काबू से बाहर हो गई.