नई दिल्ली. दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और एलजी नजीब जंग के बीच जारी विवाद बढ़ता जा रहा है. इस मुद्दे पर भाजपा नेता गुरुवार को राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे. वहीं, बीती रात दिल्ली में आईएएस एसोसिएशन की बैठक हुई, जिसमें एक प्रस्ताव भी पारित किया गया. प्रस्ताव में अफसरों के साथ दिल्ली सरकार के बर्ताव पर चिंता जताई गई और सरकार पर सार्वजनिक रूप से अफसरों को अपमानित करने का आरोप लगाया गया.

वहीं खबर है कि केंद्र सरकार वरिष्ठ नौकरशाह की नियुक्ति को लेकर लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग से जारी टकराव पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को संविधान का पाठ पढ़ा सकती है. केंद्र दिल्ली सरकार को संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार प्रशासन चलाने का सख्त संदेश देने समेत विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहा है.

संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत दिल्ली सरकार को संविधान के प्रावधानों के अनुसार काम करने का निर्देश देने का संदेश देना केंद्र सरकार के सामने उपलब्ध विकल्पों में एक है. अनुच्छेद 355 के तहत केंद्र सरकार राज्य को यह सुनिश्चित करने के लिए कह सकती है कि शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार चलाया जाए. सूत्रों के मुताबिक हालांकि यह मात्र विचार विमर्श के चरण में है कि इस प्रावधान (अनुच्छेद 355) का इस्तेमाल किया जाए या नहीं। अंतिम निर्णय लिया जाना अभी बाकी है.

बुधवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कार्यवाहक मुख्य सचिव शंकुतला गैमलिन की नियुक्ति से उत्पन्न टकराव का मिल-बैठकर हल ढूंढ़ने को कहा था. वैसे अब तक गृह मंत्रालय का यह रुख रहा है कि उप राज्यपाल और मुख्यमंत्री को नियमों एवं संविधान के अनुसार अपना अपना दायित्व पूरा करना चाहिए.

कार्यवाहक मुख्य सचिव की नियुक्ति से उत्पन्न टकराव सत्तारूढ़ आप और उप राज्यपाल के बीच एक बड़े संघर्ष का रूप ले चुका है. पिछले सप्ताह केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि जंग प्रशासन को अपने हाथ में लेने का प्रयास कर रहे हैं. केजरीवाल की कड़ी आपत्ति के बाद भी जंग ने शुक्रवार को गैमलिन को (कार्यवाहक मुख्य सचिव के) इस पद पर नियुक्त कर दिया था. शनिवार को मुख्यमंत्री ने उनसे पद नहीं संभालने को कहा था, लेकिन उन्होंने उनके निर्देश की उपेक्षा की और उपराज्याल के आदेश का पालन किया.

मंगलवार को जंग और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दोनों ही अलग अलग राष्ट्रपति से मिले तथा दोनों ने उनके सामने अपना अपना पक्ष रखा. जंग ने राष्ट्रपति से भेंट के बाद गृह मंत्री से भी मुलाकात की थी। दिल्ली सरकार केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में आती है.

IANS से भी इनपुट