नई दिल्ली. देशद्रोह का आरोप झेल रहे और इस समय जमानत पर रिहा जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने कहा कि उनके लिए अपनी पीएचडी पूरी करना शैक्षणिक जिम्मेदारी की जगह राजनीतिक जिम्मेदारी बन गया है. कन्हैया ने कहा, “हमें दी जा रही सब्सिडी पर सवाल उठाए जा रहे हैं.” कन्हैया ने यह बात उन चर्चाओं के संदर्भ में कही, जिसमें कहा जा रहा है कि जेएनयू के कुछ विद्यार्थी अपनी ‘राष्ट्र-विरोधी’ गतिविधियों के कारण कर-दाताओं के पैसों से मिल रहे लाभ के योग्य नहीं हैं. 
 
कन्हैया ने ‘नीति विश्लेषण केंद्र’ द्वारा आयोजित सम्मेलन के दौरान कहा, “हमसे पूछा जा रहा है कि हमें अपनी पीएचडी पूरी करने में इतना समय क्यों लग रहा है. इसलिए यह हमारे लिए शैक्षणिक की जगह राजनीतिक जिम्मेदारी बन गया है.” 
 
कन्हैया ने आरोप लगाया कि सरकार भारत की शिक्षा प्रणाली को बर्बाद करने की कोशिश कर रही है. कन्हैया ने कहा, “भारत में हर सरकार ने शिक्षा प्रणाली को बर्बाद करने की कोशिश की है, क्योंकि शिक्षित होने पर लोग अपनी असहमति प्रकट करना और सवाल पूछना सीख जाते हैं.” उन्होंने कहा, “सरकार के पास करोड़ों रुपये की लागत वाले लड़ाकू विमान खरीदने के लिए पैसे हैं, लेकिन वह शैक्षणिक सब्सिडी पर कटौती कर रही है. अगर उनकी भारत की यह अवधारणा है, तो मैं इसे अस्वीकार करता हूं.”
 
देशद्रोह का आरोप झेल रहे जेएनयू के एक अन्य छात्र उमर खालिद ने कहा कि वर्तमान सरकार यूनिवर्सिटीयों को जेल में तब्दील करने का प्रयास कर रही है. खालिद ने कहा, “कोई भी यूनिवर्सिटी जो असहमति प्रकट करने की अनुमति नहीं देता, वह जेल है और मोदी सरकार यूनिवर्सिटीयों को जेल में तब्दील करने का प्रयास कर रही है.” 
 
बता दें कि है कन्हैया कुमार और उमर खालिद को जेएनयू परिसर में नौ फरवरी को संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी की बरसी मनाने के लिए एक समारोह आयोजित करने पर देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. समारोह में कथित तौर पर राष्ट्र-विरोधी नारे लगाए गए थे.